तमिलनाडु चुनाव से पहले 23 जनवरी को पीएम मोदी की बड़ी रैली, नए सहयोगियों का ऐलान संभव
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को मदुरंथकम में रैली कर तमिलनाडु चुनावी अभियान की शुरुआत करेंगे. इस दौरान एनडीए में नए सहयोगियों की घोषणा संभव है, जबकि डीएमके-कांग्रेस के खिलाफ मजबूत गठबंधन बनाने पर जोर रहेगा.

चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अब महज चार महीने का समय बचा है और इससे पहले ही सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को चेन्नई से करीब 100 किलोमीटर दूर मदुरंथकम में एक विशाल जनसभा को संबोधित करने जा रहे हैं. इस रैली के जरिए राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) राज्य में अपने चुनावी अभियान की औपचारिक शुरुआत करेगा. प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर तमिलनाडु भाजपा और सहयोगी दलों में तैयारियां जोरों पर हैं.
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यह रैली केवल प्रचार की शुरुआत तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें एनडीए में शामिल होने वाले नए सहयोगियों की औपचारिक घोषणा भी हो सकती है. तमिलनाडु में एनडीए की अगुवाई कर रही एआईएडीएमके पहले ही संकेत दे चुकी है कि अभिनेता विजयकांत की पार्टी डीएमडीके के साथ बातचीत अंतिम चरण में है. ऐसे में इस गठबंधन की घोषणा भी इसी मंच से होने की संभावना जताई जा रही है.
भाजपा की कोशिश है कि पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और एएमएमके नेता टीटीवी दिनाकरन को भी एनडीए में शामिल किया जाए. हालांकि, सूत्रों के मुताबिक एआईएडीएमके महासचिव एडप्पाडी के पलानीस्वामी ने ओपीएस को गठबंधन में लेने पर आपत्ति जताई है. व्यक्तिगत मतभेदों के कारण इस मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई है. वहीं, दिनाकरन के एनडीए में शामिल होने की संभावना अधिक मानी जा रही है और इसकी घोषणा प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में 23 जनवरी को हो सकती है.
पीएमके में फूट से समीकरण बदले
तमिलनाडु की राजनीति में पीएमके पार्टी के भीतर हुआ विभाजन भी अहम भूमिका निभा रहा है. पार्टी के संस्थापक डॉ. रामदास द्वारा अपने बेटे अंबुमणि रामदास को निष्कासित किए जाने के बाद हालात जटिल हो गए हैं. एआईएडीएमके ने पीएमके के एक गुट से गठबंधन कर लिया है. अंबुमणि रामदास पहले ही एआईएडीएमके के साथ जुड़ चुके हैं और एनडीए का समर्थन कर रहे हैं, जबकि डॉ. रामदास ने अब तक अपना अंतिम रुख साफ नहीं किया है.
डीएमके गठबंधन के खिलाफ मजबूत मोर्चे की तैयारी
एआईएडीएमके और भाजपा दोनों का लक्ष्य सत्तारूढ़ डीएमके-कांग्रेस गठबंधन के खिलाफ एक मजबूत और व्यापक एनडीए खड़ा करना है. दोनों दल मानते हैं कि विपक्ष को टक्कर देने के लिए अधिकतम राजनीतिक ताकत को एकजुट करना जरूरी है. इसी रणनीति के तहत नए सहयोगियों को जोड़ने की कोशिशें तेज की गई हैं.
आगामी चुनाव में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्रि कझगम (टीवीके) को भी एक अहम फैक्टर माना जा रहा है. रजनीकांत और कमल हासन के मुकाबले विजय की लोकप्रियता इस समय चरम पर है, जिससे उनके राजनीतिक कदम को ज्यादा प्रभावी माना जा रहा है. फिलहाल टीवीके ने डीएमके और भाजपा दोनों से दूरी बना रखी है.
सत्ता विरोधी लहर पर भाजपा का भरोसा
भाजपा का आकलन है कि कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर राज्य में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सरकार के खिलाफ नाराजगी है. पार्टी इस सत्ता विरोधी माहौल का फायदा उठाना चाहती है. इसी वजह से भाजपा ने अपने सबसे बड़े और प्रभावशाली चेहरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चुनावी अभियान की शुरुआत में ही मैदान में उतारा है.


