बेगूसराय विधानसभा सीट: 'मिनी मॉस्को' से बीजेपी का गढ़ बनने तक, 2025 चुनाव में फिर रोचक मुकाबले की तैयारी
Bihar elections 2025: बेगूसराय विधानसभा सीट बिहार की प्रमुख शहरी सीटों में से एक है, जो अब बीजेपी का मजबूत गढ़ बन चुकी है. यहां ट्रैफिक, रोजगार और कचरा प्रबंधन प्रमुख मुद्दे हैं. जातीय समीकरणों में भूमिहार-वैश्य बीजेपी के साथ हैं, जबकि विपक्ष वामपंथी और शहरी मतदाताओं को साधने की कोशिश में जुटा है.

Bihar elections 2025: बिहार की बेगूसराय विधानसभा सीट सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है और जिले की सबसे प्रमुख शहरी-अर्धशहरी सीटों में शामिल है. यह क्षेत्र न केवल औद्योगिक और वाणिज्यिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अत्यंत संवेदनशील माना जाता है. कभी वामपंथी आंदोलनों का मजबूत केंद्र रहा यह इलाका ‘मिनी मॉस्को’ के नाम से भी जाना जाता था. आज यह सीट भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मजबूत गढ़ बन चुकी है.
चुनावी मुद्दे
बेगूसराय में इस बार चुनावी मुद्दों की बात करें तो ट्रैफिक जाम, जल निकासी व्यवस्था, कचरा प्रबंधन और अपराध नियंत्रण प्रमुख समस्याएं हैं. बरौनी औद्योगिक क्षेत्र की नज़दीकी के बावजूद, स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे, जिससे पलायन की समस्या बनी हुई है. शहरी क्षेत्र होने के कारण संपत्ति अपराधों में भी वृद्धि देखी गई है, जिसके चलते बेहतर पुलिसिंग की मांग उठ रही है.
जातीय समीकरण
30 सितंबर 2025 को जारी चुनाव आयोग की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, बेगूसराय विधानसभा क्षेत्र में कुल मतदाता संख्या लगभग 3.10 लाख है, जिसमें 1.65 लाख पुरुष और 1.45 लाख महिलाएं शामिल हैं. वर्ष 2020 की तुलना में मतदाताओं की संख्या में करीब 10,000 की वृद्धि हुई है. मतदान प्रतिशत 52 से 55% के बीच रहने की संभावना जताई गई है.
जातीय समीकरणों की दृष्टि से भूमिहार और वैश्य समुदाय का प्रभावी वर्चस्व है, जो परंपरागत रूप से बीजेपी के समर्थन में रहा है. यादव, मुस्लिम और अति पिछड़ा वर्ग (EBC) भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं और ये वोटर विपक्षी दलों के लिए अहम हो सकते हैं.
पिछले चुनावी नतीजों की झलक
बेगूसराय विधानसभा सीट पर 2010 से बीजेपी का कब्जा रहा है. वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के कुंदन कुमार ने कांग्रेस की अमिता भूषण को 4,500 से अधिक वोटों से हराया था. 2015 में भी बीजेपी के अमरेंद्र कुमार अमर ने कांग्रेस की ही उम्मीदवार को हराया था. वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी प्रत्याशी ने विपक्ष के साझा उम्मीदवार पर 28,000 वोटों की भारी बढ़त दर्ज की थी.
2025 का सियासी परिदृश्य
इस बार भी बीजेपी को अपने मजबूत जातीय आधार और शहरी विकास के मुद्दों पर भरोसा है. वहीं विपक्ष के लिए यह सीट चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. यदि विपक्ष को इस सीट पर सफलता पानी है, तो उन्हें वामपंथी वोटरों के साथ-साथ शहरी मतदाताओं के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी. प्रशांत किशोर की ‘जनसुराज’ मुहिम ने शिक्षित और युवा वर्ग में कुछ असर जरूर डाला है, लेकिन उसका चुनावी नतीजों पर कितना प्रभाव पड़ेगा, यह देखना बाकी है.


