Delhi Cloud Sedding : दिल्ली में क्लाउड सीडिंग पर ब्रेक, IIT कानपुर के वैज्ञानिकों ने बताया क्या है कारण
दिल्ली में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए किए जा रहे क्लाउड सीडिंग परीक्षण नमी की कमी के कारण रोक दिए गए. आईआईटी कानपुर की टीम ने दो दौर के प्रयोग किए, लेकिन बारिश नहीं हुई.

नई दिल्ली : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण को कम करने के प्रयास के तहत शुरू किया गया क्लाउड सीडिंग (Cloud Seeding) अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया गया है. आईआईटी कानपुर की वैज्ञानिक टीम इस परियोजना की निगरानी कर रही है. संस्थान की ओर से जारी बयान में कहा गया कि 29 अक्टूबर 2025 को निर्धारित क्लाउड सीडिंग गतिविधि को इसलिए स्थगित किया गया क्योंकि बादलों में आवश्यक नमी की मात्रा मौजूद नहीं थी. वैज्ञानिकों के अनुसार, यह प्रक्रिया पूरी तरह से अनुकूल मौसम और पर्याप्त वायुमंडलीय आर्द्रता पर निर्भर करती है.
नमी की कमी से बरसात नहीं हुई
प्रदूषण में आंशिक कमी दर्ज
आईआईटी कानपुर के बयान के अनुसार, दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में स्थापित मॉनिटरिंग स्टेशनों ने वास्तविक समय में वायु गुणवत्ता और नमी स्तरों में बदलाव को दर्ज किया. आंकड़ों से यह स्पष्ट हुआ कि परीक्षणों के बाद PM2.5 और PM10 के स्तर में 6 से 10 प्रतिशत तक की कमी देखी गई. यह परिणाम दर्शाता है कि सीमित नमी की स्थिति में भी क्लाउड सीडिंग से वायु गुणवत्ता में सुधार की संभावना बनी रहती है.
हमारा लक्ष्य केवल वर्षा कराना नहीं...
संस्थान ने कहा कि इन परीक्षणों से मिले निष्कर्ष भविष्य के अभियानों की योजना को और सटीक बनाएंगे. वैज्ञानिकों का मानना है कि इन आंकड़ों से यह तय करने में मदद मिलेगी कि किन मौसमीय परिस्थितियों में क्लाउड सीडिंग सबसे अधिक प्रभावी साबित हो सकती है. आईआईटी कानपुर ने यह भी कहा कि उनका लक्ष्य केवल वर्षा कराना नहीं, बल्कि इस तकनीक के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की वायु गुणवत्ता में दीर्घकालिक सुधार लाना है.
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की दिशा
दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मंजींदर सिंह सिरसा ने बताया कि क्लाउड सीडिंग के सात और परीक्षण अगले कुछ दिनों में किए जाने की योजना है. उन्होंने कहा कि दो परीक्षण पहले ही किए जा चुके हैं, लेकिन नमी की कमी के कारण वर्षा संभव नहीं हो पाई. मंत्री ने भरोसा जताया कि जैसे ही मौसम अनुकूल होगा, अभियान दोबारा शुरू किया जाएगा.
दिल्ली में क्लाउड सीडिंग का यह प्रयोग भले ही तत्काल वर्षा लाने में असफल रहा हो, लेकिन इसने वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में एक नई वैज्ञानिक आशा जगाई है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि उचित मौसमीय परिस्थितियाँ मिलती हैं, तो यह तकनीक दिल्ली जैसे महानगरों में वायु गुणवत्ता सुधारने का एक प्रभावी साधन बन सकती है.


