अमीर महिलाओं को बनाते थे टारगेट, जिम की आड़ में चलता था धर्मांतरण रैकेट...मोबाइल डाटा ने खोला राज

मिर्जापुर में सामने आए धर्मांतरण रैकेट ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है. आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले एक पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फोल्डर में महिलाओं की तस्वीरें, वीडियो और ‘टारगेट’ से जुड़ी जानकारी सामने आई है. इसी बीच मुख्य आरोपियों के देश छोड़ने की तैयारी की खबर ने मामले को और गंभीर बना दिया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

मिर्जापुर: मिर्जापुर में सामने आए कथित धर्मांतरण रैकेट की परतें अब तेजी से खुलती जा रही हैं. पुलिस जांच में ऐसे डिजिटल सबूत सामने आए हैं, जिन्होंने इस पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरोपियों के मोबाइल फोन से मिले एक पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फोल्डर ने मामले को और भी संवेदनशील बना दिया है.

इसी बीच पुलिस को इनपुट मिला है कि मुख्य आरोपी इमरान और लकी अली खान देश छोड़ने की फिराक में हैं. जानकारी मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दिल्ली एयरपोर्ट और नेपाल बॉर्डर की ओर टीमें रवाना कर दी हैं. कुल पांच टीमें अलग-अलग दिशाओं में तैनात की गई हैं, ताकि फरार आरोपियों की घेराबंदी की जा सके.

देश छोड़ने की फिराक में आरोपी

पुलिस सूत्रों के मुताबिक इमरान और लकी अली खान के पास दुबई जाने के पासपोर्ट मौजूद हैं. इमरान पहले भी दुबई जा चुका है, जिससे आशंका जताई जा रही है कि धर्मांतरण केस में नाम आने के बाद वह विदेश फरार हो सकता है. सर्विलांस के दौरान पुलिस को फोन कॉल्स के जरिए आरोपियों की मूवमेंट और उनकी प्लानिंग से जुड़ी अहम जानकारियां मिली हैं.

महिला की शिकायत से खुला पूरा नेटवर्क

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब मिर्जापुर की एक महिला ने 1090 महिला हेल्पलाइन पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई. शिकायत के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की, जिसके दौरान एक मोबाइल फोन से पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फोल्डर बरामद हुआ. इस फोल्डर में 50 से अधिक महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले, जिनमें घूमने-फिरने, यात्राओं और यहां तक कि निकाह से जुड़ी तस्वीरें भी शामिल थीं.

मोबाइल फोल्डर ने उड़ा दिए होश

शिकायत के बाद पुलिस ने मोहम्मद शेख अली को पूछताछ के लिए बुलाया. शुरुआती पूछताछ में उसने आरोपों से इनकार किया और शिकायत को झूठा बताया. लेकिन जब उसका मोबाइल फोन चेक किया गया तो एक पासवर्ड-प्रोटेक्टेड फोल्डर मिला. पासवर्ड पूछे जाने पर आरोपी घबरा गया. फोल्डर खुलते ही उसमें 50 से ज्यादा महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो सामने आए, जिनमें बाहर घूमने और निकाह से जुड़ी सामग्री भी मौजूद थी.

इस फोल्डर में अलग-अलग जिमों से जुड़े आरोपियों के साथ महिलाओं की तस्वीरें भी पाई गईं. इन्हीं डिजिटल सबूतों के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं.

जिम की आड़ में चलता था कथित रैकेट

पुलिस के अनुसार यह पूरा रैकेट KGN 1, KGN 2.0, KGN 3, आयरन फायर और फिटनेस क्लब जैसे जिमों के जरिए संचालित किया जा रहा था. अब तक छह आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें एक पुलिसकर्मी भी शामिल है. वहीं इमरान और लकी अब भी फरार हैं, जिनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है और 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है.

शुरुआत में दो महिलाओं ने औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी, जबकि 25 से 30 महिलाओं ने अप्रत्यक्ष रूप से पुलिस को अपनी आपबीती बताई है.

अमीर घरों की महिलाओं को बनाया जाता था निशाना

पुलिस का कहना है कि आरोपी विशेष रूप से संपन्न परिवारों की महिलाओं को निशाना बनाते थे. गैंग का एक सदस्य पहले महिला से संपर्क करता था, अगर वह सफल नहीं होता तो दूसरा सदस्य आगे बढ़ता था. गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद शेख अली, फैजल खान, जहीर और शादाब शामिल हैं. शादाब जीआरपी में सिपाही था, जिसे पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया.

मुफ्त जिम ट्रेनिंग से शुरू होती थी साजिश

जांच में सामने आया है कि कुछ महिलाओं को मुफ्त जिम ट्रेनिंग का लालच दिया जाता था. ट्रेनिंग के दौरान उनकी तस्वीरें ली जाती थीं. इसके बाद नंबर एक्सचेंज कर बातचीत शुरू होती और धीरे-धीरे निजी रिश्ते बनाए जाते. रुचि दिखाने पर महिलाओं को घूमने-फिरने ले जाया जाता था.

बुर्का, दबाव और धर्मांतरण के आरोप

पुलिस का आरोप है कि महिलाओं को बुर्का पहनाकर मिर्जापुर के बाजारों, मंदिरों, मजारों और अन्य स्थानों पर ले जाया जाता था और धीरे-धीरे उन्हें इस्लाम की ओर प्रभावित किया जाता था. यौन शोषण के बाद तस्वीरें और वीडियो सुरक्षित रखे जाते थे और उनसे पैसे मांगे जाते थे. पैसे न देने पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता था. डर के कारण कुछ महिलाओं ने पैसे दिए, जबकि कुछ का धर्मांतरण कराया गया.

पुलिस का दावा है कि गैंग एक समय में एक ही महिला पर काम करता था. अगर वह एक जिम में फंसती नहीं थी तो उसे दूसरे और फिर तीसरे जिम भेजा जाता था. जिम संचालक आपस में महिलाओं की तस्वीरें शेयर कर उन्हें “टारगेट” बताते थे.

पुलिस का दावा: मजबूत डिजिटल सबूत मिले

एसएसपी सोमेन वर्मा ने बताया कि शुरुआत में जांच में ज्यादा ठोस सामग्री नहीं थी, लेकिन मोबाइल फोल्डर मिलने के बाद पूरे सबूत सामने आ गए. महिलाओं को घुमाने-फिराने में इस्तेमाल की गई गाड़ियां भी बरामद कर ली गई हैं. कई महिलाओं ने बिना अपनी पहचान उजागर किए पुलिस से संपर्क कर धर्मांतरण से जुड़ी जानकारियां साझा की हैं. मामले की जांच अभी जारी है.

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