दिल्लीवासियों को प्रदूषण से मिलेगी राहत, पहली बार होगी Artificial बारिश... IIT कानपुर को ट्रायल की मिली मंजूरी
Cloud Seeding Trial Delhi : दिल्ली सरकार ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए IIT कानपुर को क्लाउड सीडिंग ट्रायल करने की अनुमति दी है. यह प्रक्रिया 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2025 तक चलेगी. इसके तहत, एक विमान से बारिश कराने की कोशिश की जाएगी ताकि प्रदूषक कणों को गिराया जा सके. यह कदम प्रदूषण कम करने और दिल्ली की हवा को साफ करने के प्रयासों का हिस्सा है, जो पहले कई बार प्रस्तावित किया गया था.

Cloud Seeding Trial Delhi: दिल्ली सरकार ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए क्लाउड सीडिंग का प्रयोग करने का निर्णय लिया है. इस प्रक्रिया को भारतीय विमानन नियामक, DGCA ने IIT कानपुर को अनुमति दी है, जो 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2025 तक चलेगा. क्लाउड सीडिंग में IIT कानपुर के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग को VT-IIT (Cessna 206-H) विमान का उपयोग करने की इजाजत मिली है, लेकिन इसके लिए कई सुरक्षा नियम और शर्तें रखी गई हैं.
DGCA के द्वारा दी गई अनुमति के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी उड़ानें उसकी निगरानी में होंगी और पायलट को पेशेवर लाइसेंस और चिकित्सा फिटनेस प्रमाणपत्र प्रदान करना होगा. इसके अलावा, उड़ान को एयरपोर्ट डायरेक्टर और ATC से अनुमति लेना अनिवार्य होगा. किसी भी तरह की एरियल फोटोग्राफी या सर्वेक्षण की अनुमति नहीं होगी और किसी प्रतिबंधित क्षेत्र के ऊपर उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी. क्लाउड सीडिंग गतिविधि को पूरी तरह निशुल्क रखा जाएगा, और किसी भी नियम का उल्लंघन करने पर अनुमति तुरंत रद्द की जा सकती है.
प्रदूषण को कम करने के लिए नई पहल
दिल्ली सरकार के इस कदम को प्रदूषण को कम करने के लिए एक नई पहल माना जा रहा है, और IIT कानपुर इससे पहले भी क्लाउड सीडिंग के प्रयोग कर चुका है. हालांकि, दिल्ली में आर्टिफिशियल बारिश कराने का प्लान कई सालों से चर्चा में था, लेकिन यह पहली बार है कि इस प्रयास को 2025 में ट्रायल के तौर पर किया जाएगा. जून 2025 में IIT कानपुर की टीम 4 जुलाई से 11 जुलाई तक ट्रायल करने वाली थी, लेकिन मौसम में असमर्थता के कारण इसे टाल दिया गया था. अब यह ट्रायल मॉनसून के बाद, जब दिल्ली में प्रदूषण का स्तर अधिक होता है, आयोजित किया जाएगा.
इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल बारिश कर प्रदूषकों को गिराना और राजधानी की जहरीली हवा से कुछ समय के लिए राहत देना है. हालांकि, इससे पहले इस प्रक्रिया के सफल होने के पक्के सबूत नहीं मिले थे, लेकिन अब इसे दिल्ली में प्रदूषण को कम करने के एक गंभीर प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.


