उत्तर प्रदेश की SIR ड्राफ्ट लिस्ट 6 जनवरी को होगी प्रकाशित, वेबसाइट पर दिखेगा पूरा डेटा

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से जुड़ा SIR ड्राफ्ट 6 जनवरी को जारी किया जाएगा, जिसे वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा. राजनीतिक दलों और आम नागरिकों को सूची की जांच कर आपत्ति या सुधार दर्ज कराने का अवसर मिलेगा.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारियों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए राज्य की मतदाता सूची का मसौदा मंगलवार, 6 जनवरी को सार्वजनिक किया जाएगा. भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय इस मसौदा सूची को जारी करेगा, ताकि आगामी चुनावों से पहले मतदाता आंकड़ों की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके. 

 चुनाव आयोग ने क्या बताया?

अधिकारियों के अनुसार, यह मसौदा सूची न केवल ऑनलाइन उपलब्ध कराई जाएगी, बल्कि इसकी हार्ड कॉपी भी सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सौंपी जाएगी. चुनाव आयोग की ओर से बताया गया है कि मसौदा मतदाता सूची को मुख्य निर्वाचन अधिकारी और जिला निर्वाचन अधिकारियों की आधिकारिक वेबसाइटों पर अपलोड किया जाएगा. इससे आम नागरिकों को अपने नाम, पते और अन्य विवरण घर बैठे जांचने की सुविधा मिलेगी. लोगों को अब किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और वे आसानी से यह देख सकेंगे कि उनका नाम मतदाता सूची में सही तरीके से दर्ज है या नहीं.

इस बार आयोग ने पारदर्शिता को और बढ़ाने के लिए एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है. मसौदा सूची के साथ-साथ उन मतदाताओं की अलग-अलग सूचियां भी ऑनलाइन जारी की जाएंगी, जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट के रूप में चिह्नित किया गया है. इसका उद्देश्य मतदाता डेटाबेस को अधिक सटीक बनाना और फर्जी या गलत प्रविष्टियों को हटाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और विश्वसनीय बनी रहे.

राजनीतिक दलों को मसौदा मतदाता सूची की हार्ड कॉपी उपलब्ध कराए जाने का मकसद यह है कि वे अपने स्तर पर सूची की जांच कर सकें. यदि किसी पार्टी को लगता है कि किसी क्षेत्र में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से जोड़े या हटाए गए हैं, तो वे समय रहते आपत्ति दर्ज करा सकें या सुधार का सुझाव दे सकें. चुनाव आयोग का मानना है कि दलों की सक्रिय भागीदारी से चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा और मजबूत होगा.

दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया 

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि मसौदा सूची का प्रकाशन अंतिम चरण नहीं है. इसके बाद दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें आम नागरिक और राजनीतिक दल दोनों हिस्सा ले सकेंगे. यदि किसी मतदाता का नाम गलती से हट गया है या विवरण में त्रुटि है, तो उसे ठीक कराने का पूरा अवसर मिलेगा. सभी आपत्तियों और सुझावों की जांच के बाद आवश्यक संशोधन किए जाएंगे और फिर अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी.

चुनाव आयोग ने दोहराया है कि उसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि उत्तर प्रदेश का हर पात्र नागरिक मतदाता सूची में शामिल हो और किसी भी तरह की त्रुटि या गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे. इस पूरी प्रक्रिया के जरिए आयोग राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की अपनी प्रतिबद्धता को एक बार फिर दोहरा रहा है.

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