कोहरे के कारण रनवे नहीं दिखाई दे रहा...अजित पवार का प्लेन क्रैश होने से पहले पायलट ने ATC को सूचित किया था

केंद्र सरकार ने बारामती विमान हादसे पर बयान जारी करते हुए बताया कि कोहरे के कारण रनवे स्पष्ट नहीं दिख रहा था. लियरजेट विमान ने पहली लैंडिंग असफल होने के बाद दोबारा प्रयास किया, लेकिन अनुमति के बाद संपर्क टूट गया और आग लग गई. इस दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित पांच लोगों की मृत्यु हुई. मामले की जांच AAIB कर रहा है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

महाराष्ट्र : बारामती हवाई अड्डे पर हुए भीषण विमान हादसे को लेकर केंद्र सरकार ने 28 जनवरी को एक विस्तृत आधिकारिक बयान जारी किया. इस दुर्घटना में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार सहित कुल पांच लोगों की जान चली गई. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, हादसे से पहले विमान चालक दल ने एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC ) को सूचित किया था कि घने कोहरे के कारण रनवे स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रहा है. प्रारंभिक तथ्यों से संकेत मिलता है कि खराब दृश्यता इस दुर्घटना का एक अहम कारण हो सकती है.

लैंडिंग से पहले की परिस्थितियां

आपको बता दें कि सरकारी बयान के मुताबिक, लियरजेट 45 विमान ने सुबह 8:18 बजे बारामती एयरफील्ड से पहली बार संपर्क स्थापित किया. इसके बाद जब विमान 30 नॉटिकल मील की दूरी पर था, तब पुणे एप्रोच द्वारा उसे बारामती के लिए रिलीज किया गया. चालक दल को दृश्य मौसम परिस्थितियों के अनुसार अपने विवेक से नीचे उतरने की अनुमति दी गई थी. उड़ान के दौरान पायलटों ने हवा की दिशा और दृश्यता के बारे में जानकारी मांगी, जिस पर उन्हें बताया गया कि हवा शांत है और दृश्यता लगभग 3,000 मीटर है.

पायलट ने बोला रनवे नहीं दिख रहा...
जब विमान रनवे 11 पर अंतिम चरण में पहुंचा, तो चालक दल ने एटीसी को सूचित किया कि रनवे दिखाई नहीं दे रहा है. इसके बाद पायलटों ने पहला लैंडिंग प्रयास छोड़ते हुए गो-अराउंड करने का फैसला लिया. यह निर्णय सुरक्षा के लिहाज से सामान्य प्रक्रिया के तहत लिया गया था. कुछ समय बाद, एटीसी द्वारा स्थिति पूछे जाने पर चालक दल ने फिर से बताया कि वे रनवे 11 पर अंतिम अप्रोच में हैं.

8:43 बजे विमान लैंडिग की अनुमति दी गई 
दूसरे प्रयास के दौरान पायलटों ने शुरुआत में रनवे न दिखने की बात कही, लेकिन कुछ ही क्षणों बाद उन्होंने एटीसी को बताया कि रनवे अब दिखाई दे रहा है. इसके बाद सुबह 8:43 बजे विमान को लैंडिंग की अनुमति दी गई. हालांकि, इस अनुमति का कोई औपचारिक जवाब एटीसी को नहीं मिला. ठीक एक मिनट बाद, 8:44 बजे, एटीसी कर्मियों ने रनवे के पास आग की लपटें देखीं. तत्काल आपातकालीन सेवाओं को मौके पर भेजा गया, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था.

अनियंत्रित एयरफील्ड की चुनौतियां
बारामती एक अनियंत्रित हवाई अड्डा है, जहां ट्रैफिक की जानकारी उड़ान प्रशिक्षण संगठनों के प्रशिक्षकों और पायलटों के समन्वय से दी जाती है. ऐसे हवाई अड्डों पर मौसम और दृश्यता की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. हादसे के बाद विमान का मलबा रनवे 11 की दाईं ओर, थ्रेशहोल्ड के पास पाया गया.

2010 का निर्मित था विमान 
दुर्घटनाग्रस्त विमान वर्ष 2010 में निर्मित था और उसके सभी आवश्यक एयरवर्दीनेस प्रमाणपत्र वैध थे. विमान के दोनों इंजनों की उड़ान अवधि और रखरखाव रिकॉर्ड भी निर्धारित मानकों के अनुरूप बताए गए हैं. पायलट इन कमांड के पास 15,000 घंटे से अधिक का उड़ान अनुभव था, जबकि सह-पायलट के पास लगभग 1,500 घंटे का अनुभव दर्ज था. दोनों का मेडिकल और प्रशिक्षण प्रमाणन भी वैध था.

जांच एएआईबी के हवाले
इस हादसे की जांच अब एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) को सौंप दी गई है. एएआईबी के महानिदेशक स्वयं दुर्घटनास्थल के लिए रवाना हो चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों पर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा. फिलहाल, सरकार ने सभी से संयम बरतने और अटकलों से बचने की अपील की है.

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