ग्लोबल सिख काउंसिल ने तख्तों की स्वतंत्रता की उठाई आवाज, धार्मिक संरक्षण पर किया मंथन...चंडीगढ़ में होगी अगली बैठक
Global Sikh Council Annual Meeting : ग्लोबल सिख काउंसिल की वार्षिक बैठक में तख्तों को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करने, भारत में पारदर्शी ट्रस्ट बनाने और पाकिस्तान स्थित सिख विरासत स्थलों के संरक्षण की मांग की गई. पंजाब में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए वैश्विक सिख समुदाय से सेवा की अपील की गई. नेताओं ने सिख एकता, सही धार्मिक समझ और भविष्य के लिए सुधारों का रोडमैप प्रस्तुत किया. अगली बैठक नवंबर 2026 में चंडीगढ़ में होगी.

Global Sikh Council Annual Meeting : ग्लोबल सिख काउंसिल ने अपनी वार्षिक बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करते हुए स्पष्ट कहा कि अब समय आ गया है कि सिख धर्म के ऐतिहासिक तख्तों की गरिमा और स्वतंत्रता बहाल की जाए. काउंसिल का मानना है कि वर्तमान में कुछ तख्तों पर राज्य सरकारों का सीधा नियंत्रण है, जो धार्मिक स्वायत्तता के खिलाफ है. विशेष रूप से महाराष्ट्र में श्री हज़ूर साहिब और बिहार में श्री पटना साहिब को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त करने की मांग ज़ोर पकड़ रही है. काउंसिल ने स्थानीय सिख समुदायों को हरसंभव समर्थन देने का संकल्प लिया.
पारदर्शिता के लिए भारत में ट्रस्ट की स्थापना
एकता के लिए भावनात्मक अपील
बैठक की शुरुआत काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. कंवलजीत कौर और सचिव हरजीत सिंह ग्रेवाल ने पंजाब में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए प्रार्थना से की. उन्होंने कहा कि बाढ़-पीड़ितों के साथ पूरी सहानुभूति है. साथ ही, उन्होंने वैश्विक सिख समुदाय से एकजुट रहने की भावनात्मक अपील की. उनका कहना था कि संगत का प्रेम और विश्वास ही सिख कौम की सबसे बड़ी ताकत है, और इसी एकता से विरासत और भविष्य को सुरक्षित रखा जा सकता है.
धार्मिक शब्दों के दुरुपयोग पर चेतावनी
काउंसिल की कानूनी मामलों की समिति के अध्यक्ष जगीर सिंह ने धार्मिक शब्दों जैसे ‘संत’ और ‘ब्रह्म ज्ञानी’ के वास्तविक अर्थ पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि ये शब्द आत्मिक अवस्थाएं हैं, न कि प्रचार और पद प्राप्ति के लिए प्रयोग किए जाने वाले टाइटल. वर्तमान में इनका दुरुपयोग बढ़ रहा है, जिससे संगत को भ्रमित किया जा रहा है. काउंसिल ने कहा कि सिख सिद्धांतों की पवित्रता को हर हाल में सुरक्षित रखना होगा.
पाकिस्तान में सिख विरासत की दुर्दशा
काउंसिल की विरासत समिति के प्रमुख यसपाल सिंह बेन्स ने पाकिस्तान में मौजूद ऐतिहासिक गुरुद्वारों की स्थिति पर चिंता जताई. उन्होंने बताया कि कई पवित्र स्थलों की हालत जर्जर है और उनकी मरम्मत की तत्काल ज़रूरत है. उन्होंने पाकिस्तान के Evacuee Trust Board और Archaeology Department को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया, लेकिन साथ ही कहा कि इस दिशा में और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है. सिख इतिहास को पुनर्जीवित करना आने वाली पीढ़ियों के लिए जरूरी है.
पंजाब में बाढ़ राहत और सेवा की पुकार
कोषाध्यक्ष हरसरन सिंह ने पंजाब के फिरोज़पुर और फाजिल्का ज़िलों में आई बाढ़ की गंभीर स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की. उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों में किसानों और आम लोगों के घर, फसलें और पशु नष्ट हो चुके हैं. काउंसिल ने वैश्विक सिख समुदाय से राहत कार्यों में सहयोग की अपील की और कहा कि यह समय सेवा और मानवता का है, जिसे नजरअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
भविष्य की दिशा और वचन
बैठक के अंत में काउंसिल के नेताओं ने आने वाले वर्षों के लिए अपने विजन और प्रतिबद्धता को दोहराया. उन्होंने धार्मिक सुधारों, कल्याणकारी योजनाओं और संसाधनों के बेहतर उपयोग की बात कही. अगली बैठक नवंबर 2026 में चंडीगढ़ में आयोजित की जाएगी. सभी प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे को सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और यह वादा किया कि ग्लोबल सिख काउंसिल दुनिया भर में सिख समुदाय की सेवा को ईमानदारी, पारदर्शिता और समर्पण के साथ जारी रखेगी.


