घना धुआं, AQI खतरनाक...दिल्ली में कहां से आया धुंवा छाया और कब होगा खत्म? मौसम विशेषज्ञों ने बताया पूरा सच
दिल्ली-NCR में कुछ दिनों से घना धुआं देखने को मिल रहा है. कई लोग इसे वाहनों से निकल रहे प्रदुषण बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग ईरान में जारी युद्ध से जोड़ रहे. हालांकि इसके पीछे की वजह कुछ और ही है.

नई दिल्ली: दिल्ली-NCR में इन दिनों हवा में घना धुआं छाया हुआ है. बसंत का मौसम है, गर्मी बढ़ रही है, लेकिन अचानक घनी धुंध ने सबको परेशान कर दिया है. सुबह से शाम तक आसमान धुंधला रहता है, दूर की चीजें साफ नहीं दिखती और सांस लेना मुश्किल हो जाता है. AQI स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच रहा है, जिससे लोगों का स्वास्थ्य जोखिम में है.
धुंध का असली कारण
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह धुंध प्रदूषण से ज्यादा प्राकृतिक धूल की वजह से है. स्काइमेट वेदर के वरिष्ठ वैज्ञानिक महेश पलावत बताते हैं कि तेज पश्चिमी हवाएं पाकिस्तान के बलूचिस्तान और थार रेगिस्तान से बड़ी मात्रा में धूल उठाकर दिल्ली-NCR ला रही है. ये इलाके सूखे हैं और तेज हवाओं से रेत-धूल आसमान में उड़ जाती है, जो सैकड़ों किलोमीटर तक फैल सकती है.
इस धूल से हवा भूरी-ग्रे हो जाती है और दिखाई देने की दूरी बहुत कम हो जाती है. यह स्मॉग जैसी लगती है, लेकिन ज्यादातर यह खनिज धूल से बनी होती है, न कि फैक्टरियों या गाड़ियों के धुएं से.
Its not likely to rain / snow oil or any toxic content in #Kashmir or #India. One should avoid any such news of Oil / Smoke plume travelling to India from Tehran.
— Weatherman Navdeep Dahiya (@navdeepdahiya55) March 9, 2026
A WD is approaching #Himalayas likely to bring light to moderate rains / snowfall over parts od #Kashmir &… pic.twitter.com/G6Op02hUKD
सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें
कुछ लोग सोशल मीडिया पर दावा कर रहे हैं कि यह धुंध ईरान में रिफाइनरी स्ट्राइक या 'पेट्रोल रेन' से आई है, लेकिन मौसम जानकार इसे गलत बताते हैं. पलावत कहते हैं, "ईरान से इतनी दूर तक धुआं पहुंचना और दिल्ली पर असर डालना मौसम की दिशा से मेल नहीं खाता." असल वजह रेगिस्तानी धूल का ट्रांसपोर्ट है, जो उत्तर भारत में इस मौसम में आम है.
AQI का हाल और स्वास्थ्य पर असर
दिल्ली-NCR में AQI स्तर 200 से ऊपर पहुंच चुका है, कई जगहों पर यह 'अनहेल्दी' या 'सीवियर' कैटेगरी में है. PM10 और PM2.5 के स्तर बढ़े हुए हैं, जिससे आंखों में जलन, खांसी और सांस की तकलीफ हो रही है. बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग ज्यादा प्रभावित है. पूरे दिन धुंध छाई रहने से विजिबिलिटी कम है और ट्रैफिक भी प्रभावित हो रहा है.
कब तक रहेगी यह स्थिति?
अच्छी खबर यह है कि यह धुंध स्थायी नहीं है. विशेषज्ञों का कहना है कि हवा की दिशा और स्पीड में बदलाव आने पर धूल नीचे बैठ जाएगी या हट जाएगी. अगले 1-2 दिनों में हालात बेहतर होने की उम्मीद है. तब तक मास्क पहनना, बाहर कम निकलना और पानी ज्यादा पीना फायदेमंद रहेगा.


