मिडिल ईस्ट जंग का भारत पर असर... LPG संकट पर पीएम मोदी की तेल और विदेश मंत्रियों संग हाई-लेवल मीटिंग
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत की एलपीजी आपूर्ति पर खतरा बढ़ गया है. पीएम मोदी ने उच्चस्तरीय बैठक कर घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने और आपूर्ति बनाए रखने के लिए आपात कदम उठाए.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर भी दिखाई देने लगा है. ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी टकराव के कारण एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है. इसी स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक में एलपीजी की संभावित कमी से निपटने और देश में गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए रणनीति पर चर्चा की गई.
मौजूदा संकट की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना बताया जा रहा है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बाद इस अहम समुद्री मार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है. यह जलडमरूमध्य भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 62 प्रतिशत आयात करता है. इनमें से बड़ी मात्रा सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों से आती है, और इनका करीब 85 से 90 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में इस मार्ग के बाधित होने से भारत की गैस आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है.
घरेलू उपभोक्ताओं को दी जा रही प्राथमिकता
सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए एक रणनीतिक योजना लागू की है. फिलहाल सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं को किसी भी तरह की परेशानी से बचाना है. भारत में हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है. इसमें से लगभग 87 प्रतिशत गैस घरेलू रसोई में उपयोग होती है, जबकि बाकी 13 प्रतिशत हिस्सा होटल, रेस्तरां और अन्य वाणिज्यिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होता है.
होटल और रेस्तरां पर पड़ने लगा असर
एलपीजी की कमी का असर पहले ही कुछ बड़े शहरों में दिखने लगा है. मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में कई होटल और रेस्तरां गैस की सीमित उपलब्धता के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. होटल और रेस्तरां से जुड़े संगठनों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है और सरकार से जल्द समाधान की मांग की है.
सरकार ने उठाए आपातकालीन कदम
इस संकट से निपटने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने कई आपातकालीन कदम उठाए हैं. रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन में कमी लाकर एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करें. इसके अलावा जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए घरेलू एलपीजी सिलेंडर की रीफिल बुकिंग के नियमों में बदलाव किया गया है. पहले जहां उपभोक्ता 21 दिन के बाद सिलेंडर बुक कर सकते थे, अब इस अवधि को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है.
आवश्यक संस्थानों को मिलेगी प्राथमिक आपूर्ति
सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य आवश्यक सेवाओं को गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो. इसके लिए आयातित एलपीजी का एक हिस्सा इन जरूरी क्षेत्रों की ओर भेजा जा रहा है.
तेल विपणन कंपनियों के तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष समिति भी बनाई गई है. यह समिति होटल, रेस्तरां और अन्य उद्योगों से आने वाले अनुरोधों की समीक्षा करेगी. गैस का वितरण जरूरत, उपलब्धता और प्राथमिकता के आधार पर तय किया जाएगा.
सामने आए बयान
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने भी बयान जारी कर कहा है कि अंतरराष्ट्रीय हालात के बावजूद एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी स्पष्ट किया है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति के दौरान गैर-जरूरी व्यावसायिक गैस आपूर्ति पर अंतिम फैसला इसी समिति द्वारा लिया जाएगा.


