12,200 गांवों में बस सेवा, जमीन की रजिस्ट्री और ओला-उबर पर नए नियम; CM योगी ने कैबिनेट में 31 प्रस्तावों को दी मंजूरी
सीएम योगी की अध्यक्षता में आज लोक भवन में कैबिनेट की बैठक हुई. इस दौरान 31 महत्वपूर्ण प्रस्ताओं को मंजूरी दी गई. इसमें जमीन की रजिस्ट्री से लेकर परिवहन योजना तक कई प्रस्ताव शामिल है.

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में 10 मार्च 2026 को लोक भवन में कैबिनेट की बैठक हुई. इस बैठक में प्रदेश के विकास, सुशासन और लोगों की सुविधा से जुड़े 31 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी मिली. कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, रविंद्र जायसवाल और दयाशंकर सिंह ने इन फैसलों की जानकारी दी.
इनमें जमीन की रजिस्ट्री में पारदर्शिता लाना, ग्रामीण इलाकों में बस सेवा शुरू करना और सरकारी कर्मचारियों के नियमों में बदलाव जैसे बड़े कदम शामिल हैं.
जमीन की रजिस्ट्री में अब सख्त जांच जरूरी
योगी सरकार ने भू-माफिया और जमीन के फर्जीवाड़े पर रोक लगाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है. अब जमीन की रजिस्ट्री से पहले खतौनी और स्वामित्व से जुड़े सभी राजस्व रिकॉर्ड की जांच अनिवार्य होगी. बिना इस जांच के कोई भी रजिस्ट्री नहीं हो सकेगी.
इससे आम लोगों का पैसा सुरक्षित रहेगा और फर्जी दस्तावेजों से होने वाली धोखाधड़ी रुकेगी. मंत्री रविंद्र जायसवाल ने कहा कि यह कदम भू-माफियाओं के गोरखधंधे पर सीधी चोट है.
मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना से गांवों को राहत
परिवहन विभाग की 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना' को हरी झंडी मिल गई है. इस योजना से उत्तर प्रदेश के 12,200 दूर-दराज के गांवों में बस सेवा पहुंचेगी. जहां पहले बस नहीं जाती थी, वहां अब छोटी और मझोली बसें चलेगी. ये 28 सीटर बसें आसानी से गांवों की सड़कों पर चल सकेगी. इससे छात्र, किसान और मरीजों को शहर आने-जाने में बहुत आसानी होगी.
- बसें रात में गांव पहुंचकर वहीं रुकेंगी.
- सुबह 10 बजे से पहले जिला मुख्यालय के लिए निकलेंगी.
- शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक फिर गांवों में चलेंगी.
- हर गांव में बस कम से कम दो चक्कर लगाएगी.
- इन बसों पर कोई टैक्स या परमिट की जरूरत नहीं होगी.
- किराया जिलाधिकारी की कमेटी तय करेगी.
ओला-उबर जैसी कंपनियों पर भी नियम लागू
कैबिनेट ने ओला, उबर और रैपिडो जैसी ऐप आधारित कैब और टैक्सी कंपनियों के लिए नए नियम बनाए हैं. अब इन्हें परिवहन विभाग में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. आवेदन शुल्क 25,000 रुपये रखा गया है. कंपनी को 5 लाख रुपये जमा करने होंगे.
रिन्यूअल के लिए 5,000 रुपये और हर 5 साल में रिन्यूअल जरूरी होगा. यह नियम केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार लागू किए गए हैं.
सरकारी कर्मचारियों के लिए सख्त आचरण नियम
कार्मिक विभाग के प्रस्ताव पर सरकारी कर्मचारियों की आचरण नियमावली में संशोधन किया गया है. अब अगर कोई कर्मचारी अपने दो महीने के मूल वेतन से ज्यादा कीमत की कोई चल संपत्ति (जैसे कार, सोना या अन्य चीज) खरीदता या बेचता है, तो उसे अपने अधिकारी को सूचना देनी होगी.
साथ ही छह महीने के मूल वेतन से ज्यादा रकम शेयर बाजार में लगाने पर भी घोषणा अनिवार्य होगी. यह बदलाव पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए किया गया है.


