'बंगाल में कोई वोटर वंचित नहीं...'विधानसभा चुनाव से पहले CEC ज्ञानेश कुमार ने जनता से किया वादा

पश्चिम बंगाल में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले ज्ञानेश कुमार ने साफ कर दिया है कि कोई भी योग्य मतदाता मतदान से वंचित नहीं रहेगा. यानी कि वोटिंग लिस्ट से उनका नाम नहीं हटेगा.

Sonee Srivastav

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि कोई भी योग्य मतदाता मतदान से वंचित नहीं रहेगा. उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग का मुख्य लक्ष्य राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूरी तरह शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करना है.

लिस्ट में कोई गलत हटाव नहीं होगा

मुख्य चुनाव आयुक्त ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया संविधान के अनुसार चल रही है और यह पूरी तरह निष्पक्ष है. उन्होंने आश्वासन दिया, "किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा."

हर योग्य नागरिक को वोट देने का पूरा अधिकार मिलेगा. चुनाव आयोग इस बात पर सतर्क है कि सूची साफ-सुथरी रहे, लेकिन इसमें किसी असली मतदाता को नुकसान न पहुंचे.

शांतिपूर्ण और भयमुक्त चुनाव की प्रतिबद्धता

ज्ञानेश कुमार ने बताया कि बंगाल की जनता हमेशा से शांतिपूर्ण लोकतंत्र में विश्वास करती आई है. आयोग राज्य में हिंसा-मुक्त माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना है, जहां मतदाता उत्साह से अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकें." सभी सरकारी कर्मचारियों को चुनाव आयोग के निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा. किसी भी लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

पारदर्शिता के लिए 100% वेबकास्टिंग

चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ने घोषणा की कि पूरे राज्य के मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग लागू की जाएगी. इससे मतदान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन देखी जा सकेगी और विश्वास बढ़ेगा.

पश्चिम बंगाल में लगभग 80,000 मतदान केंद्र हैं, जिनमें से करीब 61,000 ग्रामीण इलाकों में हैं. इतने बड़े पैमाने पर चुनाव कराने के लिए आयोग पूरी तैयारी में जुटा है.

विरोध प्रदर्शन के बावजूद कार्यक्रम जारी

दौरे के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त को कुछ जगहों पर विरोध का सामना करना पड़ा. कालीघाट और दक्षिणेश्वर मंदिर में 'वापस जाओ' के नारे और काले झंडे दिखाए गए.

एसआईआर प्रक्रिया से जुड़े विवाद के कारण यह विरोध हुआ, लेकिन उन्होंने अपने सभी कार्यक्रम पूरे किए, जैसे बेलूर मठ का दौरा. सुप्रीम कोर्ट ने भी एसआईआर में छूटे दावों और आपत्तियों पर कार्रवाई के लिए निर्देश दिए हैं.अब तक लाखों आपत्तियों का निपटारा हो चुका है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag