फायदा नहीं तो तोड़ ले गठबंधन.. BJP पर भड़के संजय निषाद बोले- छोटे नेताओं से बेइज्जती न कराए

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और निषाद पार्टी के अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यदि गठबंधन से फायदा नहीं दिखता, तो भाजपा गठबंधन तोड़ दे, लेकिन अपमान न करे. उन्होंने अपने बेटे को पद से हटाकर परिवारवाद से दूरी दिखाई. निषाद पार्टी ने आरक्षण की मांग दोहराई और बिहार चुनाव लड़ने का ऐलान किया. दिल्ली में पार्टी का 10वां स्थापना दिवस भी मनाया गया.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

Sanjay Nishad BJP Alliance : योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद ने अपने तीखे बयानों से राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है. उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि अगर बीजेपी को उनकी पार्टी से कोई फायदा नहीं नजर आता, तो गठबंधन तोड़ने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन छोटे नेताओं के जरिए बेइज्जती न कराई जाए. उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी में शामिल कुछ “आयातित नेता” जो पहले सपा, बसपा और कांग्रेस में थे अब अपने बड़बोलेपन से पार्टी की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं.

पूर्व राज्यसभा सांसद पर निशाना

गोरखपुर के एनेक्सी भवन सभागार में एक कार्यक्रम के दौरान डॉ. संजय निषाद का गुस्सा साफ झलक रहा था. उन्होंने सीधे तौर पर तो नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों में पूर्व राज्यसभा सांसद जयप्रकाश निषाद पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि यह नेता पहले हाथी (बसपा का प्रतीक) पर सवार थे, अब कमल (बीजेपी का प्रतीक) हाथ में ले लिया है. साथ ही यह दावा करते हैं कि निषादों को टिकट दिला सकते हैं, जबकि खुद का टिकट तय नहीं है. संजय निषाद ने यहां तक कहा कि अगर ये नेता उनकी पार्टी में आना चाहें, तो वे उन्हें टिकट दे सकते हैं, लेकिन पहले आरक्षण की मांग को लेकर संघर्ष करें और सड़कों पर उतरें.

गठबंधन की ताकत और 2018 की जीत की याद
संजय निषाद ने बीजेपी को 2018 की याद दिलाई, जब सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद निषाद पार्टी के समर्थन से बीजेपी को बड़ी जीत मिली थी. उन्होंने बीजेपी नेताओं को चेतावनी दी कि सत्ता के घमंड में कोई भी नेता न रहे, क्योंकि गठबंधन से ही जीत की राह आसान होती है.

आरक्षण के लिए संघर्ष और 10वां स्थापना दिवस
डॉ. निषाद ने अपने समाज के लिए अनुसूचित जाति (SC) में शामिल होने की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहे संघर्ष का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि 2013 से यह आंदोलन शुरू हुआ था, और अब देशभर के 75 जिलों में इसे समर्थन मिल रहा है. 20 अगस्त को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में निषाद पार्टी ने अपना 10वां स्थापना दिवस मनाया, जहां हजारों की संख्या में मछुआरा समाज के लोग जुटे थे. इस अवसर पर उन्होंने निषाद आरक्षण की मांग को फिर से प्रमुखता से उठाया.

पारिवारिक राजनीति से दूरी, बेटे को पद से हटाया
डॉ. संजय निषाद ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने परिवारवाद से ऊपर उठकर राजनीति की है. इसी कारण उन्होंने अपने बेटे और पार्टी विधायक सरवन निषाद को प्रदेश प्रभारी पद से हटा दिया. उन्होंने अन्य दलों के नेताओं को चुनौती दी कि क्या वे भी ऐसा कर सकते हैं?

बिहार चुनाव में निषाद पार्टी की तैयारी
संजय निषाद ने घोषणा की कि उनकी पार्टी आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में भी हिस्सा लेगी. इसके लिए तैयारियां जोरों पर हैं और संगठन को मजबूत किया जा रहा है. वे स्वयं जल्द ही बिहार के जिलों का दौरा करेंगे और कार्यकर्ताओं से संवाद करेंगे, जिसके बाद उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया जाएगा.

भगवान राम में आस्था और योगी को मार्गदर्शक बताया
अपने संबोधन में डॉ. निषाद ने कहा कि वे भगवान राम को मानते हैं और खुद को निषादराज का वंशज मानते हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपना मार्गदर्शक बताया, लेकिन साथ ही यह भी जताया कि अगर सम्मान नहीं मिला, तो गठबंधन को लेकर फैसला भी लिया जा सकता है.

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