पटना मेट्रो में नौकरी का झांसा, फर्जी वेबसाइट से बेरोजगारों से लाखों की ठगी

पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को ठगने वाले एक बड़े फर्जी रैकेट का खुलासा हुआ है. पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी वेबसाइट, परीक्षा और ट्रेनिंग के जरिए लाखों रुपये वसूल रहे थे.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

पटना: पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं को ठगने वाले एक बड़े फर्जी रैकेट का पटना पुलिस ने पर्दाफाश किया है. इस मामले में पुलिस ने गिरोह के कथित मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपी पिछले करीब दो साल से फर्जी वेबसाइट, सोशल मीडिया विज्ञापनों और नकली परीक्षाओं के जरिए युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे थे.

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खुद को पटना मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से जुड़ा बताकर युवाओं से रजिस्ट्रेशन फीस, ट्रेनिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर पैसे ऐंठता था. ठगी का शिकार बने अभ्यर्थी जब नौकरी या ट्रेनिंग के लिए बताए गए पते पर पहुंचे, तब उन्हें धोखाधड़ी का एहसास हुआ.

फर्जी वेबसाइट और सोशल मीडिया कैंपेन से फैलाया जाल

पुलिस ने बताया की आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे एक फर्जी पटना मेट्रो वेबसाइट चला रहे थे. यह गैंग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार डिजिटल कैंपेन चला रहा था, ताकि "पटना मेट्रो जॉब्स" जैसी सर्च पर उनके विज्ञापन सबसे ऊपर दिखाई दें और ज्यादा से ज्यादा बेरोजगार युवक उनके संपर्क में आएं.

1200 रुपए रजिस्ट्रेशन फीस, फिर फर्जी परीक्षा और इंटरव्यू

पुलिस के मुताबिक, गिरोह सबसे पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के नाम पर करीब 1200 रुपए वसूलता था. पूरे बिहार से 2,000 से ज्यादा अभ्यर्थियों ने आवेदन किया, जिनमें से लगभग 700 को अगले चरण के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया.

जुलाई 2025 में पटना में फर्जी लिखित परीक्षा आयोजित कराई गई, इसके बाद नकली इंटरव्यू भी हुए.

पेड ट्रेनिंग के नाम पर दूसरा झांसा

700 शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों में से करीब 80 लोगों को जानबूझकर फेल कर दिया गया. इसके बाद उन्हें डेटा ऑपरेटर, इलेक्ट्रीशियन या फिटर जैसी भूमिकाओं के लिए "पेड ट्रेनिंग" का दूसरा मौका दिया गया. यह ट्रेनिंग पूरी तरह फर्जी थी.

50 से 60 हजार रुपए तक वसूली

पुलिस जांच में सामने आया है कि ट्रेनिंग फीस 50,000 से 60,000 रुपए तक वसूली जाती थी. जिन युवाओं ने पैसे दिए, उन्हें ट्रेनिंग या जॉब पोस्टिंग के लिए जिन पतों पर बुलाया गया, वहां पहुंचने पर कोई मौजूद नहीं मिला. इसके बाद पीड़ितों को ठगी का अहसास हुआ.

अब तक करीब 8 लाख रुपए की ठगी

एएसपी अभिनव कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में अब तक करीब 8 लाख रुपए की ठगी की पुष्टि हुई है. हालांकि, जांच आगे बढ़ने के साथ यह रकम और ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है.

कंप्यूटर सेंटर संचालक निकला मास्टरमाइंड

गिरफ्तार आरोपियों में नवनीत कुमार को इस गिरोह का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. वह सहरसा जिले का रहने वाला है और पहले कंप्यूटर सेंटर चलाता था. उसके दो सहयोगी, सुपौल निवासी अखिलेश कुमार चौधरी और नवादा निवासी दिनेश कुमार साओ फर्जी इंटरव्यू कराने में उसकी मदद कर रहे थे. तीनों को गिरफ्तार कर आगे की पूछताछ की जा रही है.

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