227 में से 118 सीटों पर आगे...45 साल में पहली बार BMC में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी BJP, जानें अब किसे बनाएगी मेयर ?
महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव में बीजेपी 29 में से 23 नगर निगमों में बीजेपी गठबंधन आगे है. 45 साल के बाद बीजेपी ने मुंबई पर पूरी तरह से अपना कब्जा कर लिया है. इसके साथ ही बीएमसी में पहली बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है कि अब वो अपना मेयर बना सकती है. ऐसे में देखने वाली बात यह है कि बीजेपी किसे मेयर बनाती है ?

मुंबई : महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर महापालिका चुनाव के नतीजे साफ तौर पर बीजेपी गठबंधन के पक्ष में रहे. बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना ने मिलकर विपक्षी दलों को पीछे छोड़ दिया. मुंबई में बीजेपी पहली बार बीएमसी में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और मेयर पद हासिल करने की स्थिति में है. पुणे, नागपुर, नासिक समेत कई नगर निगमों में भी गठबंधन को प्रमुख बढ़त मिली.
आपको बता दें कि बीएमसी में बीजेपी गठबंधन को बहुमत प्राप्त हुआ है. 227 सीटों वाले मुंबई निगम में महायुति को 118 सीटें मिल रही हैं. बीजेपी उम्मीदवारों की संख्या 90 और शिंदे की शिवसेना 28 सीटों पर आगे चल रही है. इस बहुमत के साथ मुंबई राजनीतिक रूप से पूरी तरह भगवामय नजर आ रही है. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) को मात्र 63 सीटों पर बढ़त मिली है. कांग्रेस और मनसे की स्थिति बेहद कमजोर रही.
45 साल बाद मुंबई पर कब्जा
ढाई साल का होता है मेयर का कार्यकाल
बीएमसी में मेयर चुनाव प्रक्रिया के तहत पार्षदों का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है. 227 पार्षदों में बहुमत हासिल करने वाली पार्टी का उम्मीदवार मेयर बनता है. मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है, जबकि पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं. मुंबई में राजनीतिक शक्ति मेयर के पास होती है, वहीं प्रशासनिक कार्यों के लिए नगर आयुक्त जिम्मेदार होते हैं.
ये नेता मेयर के लिए संभावित दावेदारा
बीजेपी ने अपने मेयर पद के उम्मीदवार के रूप में मराठी समुदाय का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की योजना बनाई है. बीएमसी जीत के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेता पार्षद बने हैं, जिनमें तेजस्वी घोसालकर और नील सोमैया जैसे नाम शामिल हैं. ये नेता मेयर पद के लिए संभावित दावेदार माने जा रहे हैं.
इस प्रकार बीएमसी और महाराष्ट्र के अन्य नगर निगमों में बीजेपी गठबंधन ने अपना प्रभाव जमाते हुए विपक्ष को पूरी तरह मात दी है. राज्य की राजनीतिक तस्वीर में यह चुनावी परिणाम ऐतिहासिक बदलाव का संकेत देता है और भविष्य में बीजेपी की स्थायी स्थिति की ओर इशारा करता है.


