युवाओं की तरह मुझे भी रिस्क लेना पसंद...स्टार्ट अप इंडिया के 10 साल पूरे होने पर PM मोदी बोले-हमने नौजवानों को खुला आसमान दिया

नेशनल स्टार्ट अप डे पर दिल्ली के भारत मंडपम से पीएम मोदी ने देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के युवाओं का फोकस देश की समस्याओं का समाधान करने पर हैं. आज जोखिम लेना युवाओं के जिंदगी की मुख्यधारा में शामिल हो चुका है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि युवाओं की तरह मुझे भी रिस्क लेना पसंद है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जिस तरह आज का युवा जोखिम लेने से नहीं डरता, उसी तरह उन्हें भी अपने जीवन में रिस्क लेना पसंद है. उन्होंने कहा कि अपने राजनीतिक भविष्य को दांव पर लगाकर भी उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए, जो देश के दीर्घकालिक हित में थे. दिल्ली के भारत मंडपम में नेशनल स्टार्टअप डे के अवसर पर युवाओं से संवाद करते हुए प्रधानमंत्री ने स्टार्टअप इंडिया के दस वर्ष पूरे होने को एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया.

स्टार्टअप इंडिया के दस साल

आपको बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते दस वर्षों में स्टार्टअप इंडिया महज एक योजना नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन बन चुका है. उन्होंने बताया कि आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है. युवाओं का ध्यान अब सिर्फ नौकरी पाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे देश की जमीनी समस्याओं के समाधान पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अब जोखिम लेना मुख्यधारा का हिस्सा बन चुका है और मासिक वेतन से आगे सोचने वाले युवाओं को समाज में सम्मान की नजर से देखा जाता है.

दस साल पहले और आज के भारत में बड़ा अंतर
प्रधानमंत्री ने युवाओं को याद दिलाया कि एक दशक पहले हालात बिल्कुल अलग थे. व्यक्तिगत प्रयासों और नवाचार के लिए बहुत कम अवसर उपलब्ध थे. उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस स्थिति को चुनौती दी और युवाओं को खुला आसमान देने का प्रयास किया. आज उसी सोच का परिणाम है कि स्टार्टअप संस्कृति एक क्रांति का रूप ले चुकी है.

राजनीतिक जोखिम लेने के फैसलों का किया उल्लेख
युवाओं की जोखिम लेने की क्षमता की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रिस्क लेना उनकी भी पुरानी आदत रही है. उन्होंने कहा कि कई ऐसे काम थे जिन्हें पिछली सरकारों ने दशकों तक छूने की हिम्मत नहीं की, क्योंकि उन्हें चुनाव हारने या सत्ता जाने का डर था. ऐसे कामों को राजनीतिक रूप से जोखिम भरा बताया जाता था, लेकिन उन्होंने उन्हें अपना दायित्व समझकर पूरा किया.

देश के लिए जोखिम, लाभ करोड़ों नागरिकों का
प्रधानमंत्री ने कहा कि उनका मानना है कि जो काम देश के लिए जरूरी है, उसे किसी न किसी को करना ही होता है और उसके लिए जोखिम उठाना पड़ता है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि नुकसान होगा तो वह उनका व्यक्तिगत होगा, लेकिन अगर फायदा हुआ तो उसका लाभ देश के करोड़ों परिवारों को मिलेगा. यही सोच उनकी नीतियों की बुनियाद रही है.

इनोवेशन को बढ़ावा देने वाला इकोसिस्टम तैयार
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में ऐसा वातावरण तैयार किया गया है, जो नवाचार को प्रोत्साहित करता है. उन्होंने कहा कि आज भारत में सवा सौ से अधिक सक्रिय यूनिकॉर्न स्टार्टअप हैं, जबकि 2014 में इनकी संख्या केवल चार थी. यह बदलाव भारत की उद्यमशीलता क्षमता को दर्शाता है.

कंफर्ट जोन से बाहर निकल रहा है भारत का युवा
भविष्य के उद्यमियों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारतीय युवा कंफर्ट जोन में जिंदगी बिताने को तैयार नहीं है. उसे घिसी-पिटी और सीमित सोच वाली जिंदगी मंजूर नहीं है. यही मानसिकता भारत को आत्मनिर्भर और नवाचार में अग्रणी राष्ट्र बना रही है.

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