Madhya Pradesh News: सतना के अस्पताल में बड़ी लापरवाही आई सामने! मासूमों को चढ़ाया संक्रमित ब्लड, अब 4 HIV की चपेट में

सतना जिले के जिला अस्पताल में ब्लड बैंक की लापरवाही से थैलेसीमिया से पीड़ित चार बच्चों को एचआईवी संक्रमण हुआ. जांच में डोनर सत्यापन और ब्लड टेस्ट में चूक सामने आई, जिससे स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

सतनाः मध्य प्रदेश के सतना जिले से सामने आई घटना ने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से चढ़ाए गए खून के कारण थैलेसीमिया से पीड़ित चार मासूम बच्चे एचआईवी जैसी गंभीर बीमारी से संक्रमित पाए गए हैं. यह मामला न सिर्फ चिकित्सा लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जिन संस्थानों पर लोगों की जान बचाने की जिम्मेदारी है, वहीं सबसे बड़ी चूक कैसे हो सकती है.

इलाज बना जानलेवा खतरा

थैलेसीमिया से जूझ रहे बच्चों के लिए नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन जीवन का आधार होता है. सतना के ये चारों बच्चे भी हर महीने जिला अस्पताल के ब्लड बैंक से खून लेते थे. लेकिन जब नियमित जांच के दौरान उनकी रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई, तो परिवारों पर मानो पहाड़ टूट पड़ा. माता-पिता पूरी तरह स्वस्थ हैं, ऐसे में बच्चों में संक्रमण का एकमात्र संभावित कारण असुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन ही माना जा रहा है. जिस खून से उन्हें जीवन मिलना था, वही उनके लिए गंभीर बीमारी का कारण बन गया.

ब्लड बैंक की कार्यप्रणाली पर सवाल

नियमों के अनुसार, किसी भी रक्तदाता के खून को इस्तेमाल से पहले एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी जैसी बीमारियों की पूरी जांच अनिवार्य होती है. इसके बावजूद चार बच्चों का संक्रमित होना यह दर्शाता है कि जांच प्रक्रिया में भारी लापरवाही हुई है. अस्पताल प्रशासन का कहना है कि पहले रैपिड टेस्ट किए जाते थे और अब एलाइज़ा तकनीक अपनाई जा रही है, लेकिन संक्रमण के ‘विंडो पीरियड’ का हवाला देकर जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जा रही है. सवाल यह उठता है कि अगर जांच प्रणाली पूरी तरह सुरक्षित नहीं थी, तो बच्चों की जान को जोखिम में क्यों डाला गया?

डोनर सत्यापन में भी बड़ी चूक

जांच के दौरान एक और गंभीर तथ्य सामने आया है. जिन रक्तदाताओं का खून इन बच्चों को चढ़ाया गया था, उनमें से कई का पता ही नहीं चल पा रहा है. करीब आधे डोनर्स के मोबाइल नंबर गलत निकले और कई के पते अधूरे पाए गए. इससे यह साफ हो गया कि ब्लड बैंक ने बिना उचित पहचान और सत्यापन के रक्त संग्रह किया. यह लापरवाही सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ है.

बढ़ता एचआईवी संक्रमण

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब मध्य प्रदेश में एचआईवी संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है. आंकड़ों के अनुसार, 2021 में जहां संक्रमण दर 0.08 प्रतिशत थी, वहीं 2023 तक यह बढ़कर 0.43 प्रतिशत हो गई है. नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन पहले ही चेतावनी दे चुका है कि अगर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो 2030 तक एड्स उन्मूलन का लक्ष्य मुश्किल हो जाएगा. सतना की यह घटना बताती है कि समस्या सिर्फ आंकड़ों की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर लापरवाही की है.

इंसाफ की उम्मीद

मामले की गंभीरता को देखते हुए सतना कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस. ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि चूक किस स्तर पर हुई—क्या जांच किट में खामी थी या कर्मचारियों की लापरवाही जिम्मेदार है. पीड़ित बच्चों के परिजन गुस्से और डर में हैं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. सवाल अब यही है कि जब इलाज ही बीमारी का कारण बन जाए, तो आम नागरिक किस पर भरोसा करे?

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