अदालत में वकील से मारपीट पर भड़के CJI सूर्यकांत, बोले 'गुंडाराज बर्दाश्त नहीं'
अदालत परिसर में वकील से मारपीट के मामले ने न्याय व्यवस्था की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सुप्रीम कोर्ट में मामला उठते ही CJI सूर्यकांत ने सख्त रुख अपनाते हुए इसे “गुंडाराज” करार दिया.

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के सामने एक वकील ने अदालत परिसर में अपने साथ हुई मारपीट का गंभीर मुद्दा उठाया, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में कड़ा रुख देखने को मिला. वकील ने बताया कि यह घटना एडिशनल डिस्ट्रिक्ट जज (ADJ) की मौजूदगी में कोर्ट रूम के अंदर हुई, जहां दूसरे पक्ष के लोगों ने उन पर हमला किया.
इस पूरे मामले को सुनते ही CJI सूर्यकांत ने तीखी प्रतिक्रिया दी और साफ शब्दों में कहा कि अदालतों में किसी भी तरह का "गुंडाराज" बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने इसे कानून व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक बताया और तुरंत शिकायत दर्ज कराने के निर्देश दिए.
कोर्ट रूम में मारपीट का आरोप
सुप्रीम कोर्ट में वकील ने बताया, "मैं ADJ हरजीत सिंह पाल की अदालत तीस हजार कोर्ट में पेश हुआ था. मैं आरोपी की तरफ से कोर्ट में पेश हुआ था. शिकायतकर्ता और उसके कई गुंडों ने मुझपर हमला किया. पीटा भी. जज वहीं बैठे थे. कोर्ट के सभी सदस्य वहीं पर बैठे हुए थे."
वकील ने यह भी आरोप लगाया कि कोर्ट रूम का दरवाजा बंद कर उनके साथ मारपीट की गई, जिससे न्यायालय की गरिमा पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.
CJI ने जताई नाराजगी
मामले को सुनने के बाद CJI सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की घटनाएं न्याय व्यवस्था को कमजोर करती हैं. उन्होंने दो टूक कहा, "इस तरह का गुंडा राज हमें स्वीकार्य नहीं है. इसका मतलब कानून का व्यर्थ होना है."
शिकायत दर्ज कराने के निर्देश
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने वकील को निर्देश दिया कि वह इस घटना को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराएं. उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा जाए और उसमें CJI को भी मार्क किया जाए.
CJI ने स्पष्ट किया, "सीजे को लेटर लिखें और मुझे भी मार्क करें. इसपर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को संज्ञान लेने दीजिए और कार्रवाई प्रशासनिक पक्ष की तरफ से की जाएगी."
न्याय व्यवस्था की साख पर सवाल
इस घटना ने अदालतों की सुरक्षा और वकीलों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है. सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख इस बात का संकेत है कि न्यायालय की गरिमा और कानून के राज से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा.


