उत्तराखंड के तीर्थों में बड़ा फैसला: गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं की एंट्री बैन, बदरीनाथ-केदारनाथ में भी प्लान
गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. मंदिर समिति के फैसले को मुख्यमंत्री का समर्थन मिला है. अब बदरीनाथ, केदारनाथ और अन्य धार्मिक स्थलों पर भी ऐसी रोक की तैयारी है.

उत्तराखंड: गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. यह अहम निर्णय श्री गंगोत्री मंदिर समिति द्वारा सर्वसम्मति से लिया गया. समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि यह कदम धार्मिक आस्था और मान्यताओं के प्रति श्रद्धा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. अब यह प्रस्ताव बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में भी लागू किए जाने की योजना है. इसके साथ ही उत्तराखंड के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भी इसी तरह की रोक लगाने की मांग उठने लगी है.
गंगोत्री धाम में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले के बाद, हरिद्वार के गंगा घाटों पर भी इसी तरह का प्रतिबंध पहले ही लागू किया जा चुका है. हर की पैड़ी और अन्य प्रमुख गंगा घाटों पर सरकार की ओर से गैर हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित कर दिया गया है. इसके अलावा, धार्मिक संस्थाएं अब पूरे कुंभ क्षेत्र में भी इस तरह की रोक लगाने की मांग कर रही हैं. इससे यह स्पष्ट होता है कि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों पर प्रवेश के संबंध में नए प्रतिबंधों को लेकर एक नया वातावरण बन रहा है.
गंगोत्री के साथ शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में भी रोक
गंगोत्री धाम के साथ ही शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा में भी गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित कर दिया गया है. श्री गंगोत्री मंदिर समिति ने इस पर फैसला लिया है और इसे जल्द ही लागू किया जाएगा. गंगोत्री धाम के धार्मिक और पवित्र स्थानों की सुरक्षा और उनकी मान्यता को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है.
बीकेटीसी अध्यक्ष का बयान
बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि हरिद्वार में गैर हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने का निर्णय महत्वपूर्ण था, और अब इस प्रकार का कदम बदरीनाथ और केदारनाथ धाम में भी उठाया जाएगा. इसके लिए समिति जल्द ही बोर्ड में एक प्रस्ताव लाकर इसे मंजूरी प्राप्त करेगी और फिर सरकार के पास इसे प्रस्तुत किया जाएगा.
मुख्यमंत्री ने किया फैसले का समर्थन
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि राज्य के पवित्र धार्मिक स्थल हमारी आस्था का केंद्र हैं और यहां की संस्कृति एवं पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ही कार्य किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों की सलाह पर उचित कदम उठाएगी. हरिद्वार के गंगा घाटों के मामले में पुराने एक्ट का अध्ययन किया जाएगा, और अगर बीकेटीसी से कोई प्रस्ताव आता है तो सरकार सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे का कदम उठाएगी.
धर्म की पवित्रता बनाए रखने की प्रतिबद्धता
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि सरकार सनातन धर्म के आस्था के केंद्रों की पवित्रता बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगी और इसके लिए ठोस कदम उठाएगी. इन धार्मिक स्थलों की पवित्रता और सम्मान को बनाए रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है.
इस फैसले से यह संदेश जाता है कि उत्तराखंड में धार्मिक स्थलों की पवित्रता और आस्था की रक्षा के लिए सरकार और धार्मिक समितियां मिलकर काम कर रही हैं. इस मुद्दे पर जनता के बीच बहस और मांग बढ़ रही है, और आने वाले समय में इसी तरह के फैसले अन्य धार्मिक स्थानों पर भी हो सकते हैं.


