प्रयागराज विवाद से लेकर UGC नियमों तक, आगरा रैली में गरजे चंद्रशेखर आजाद
आगरा की जनसभा में चंद्रशेखर आजाद ने संभल हिंसा, प्रयागराज संत विवाद और यूजीसी नियमों पर सरकार को घेरते हुए संविधान और मानवाधिकारों की दुहाई दी. उन्होंने कहा कि आजाद समाज पार्टी शिक्षा, रोजगार और बराबरी के अधिकार के एजेंडे के साथ जनता की आवाज बनेगी.

आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आजाद ने आगरा के जीआईसी मैदान में आयोजित विशाल जनसभा में केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला. रैली स्थल को अंतिम समय में बदले जाने के बावजूद बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे और इसे सरकार विरोधी शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा गया.
प्रयागराज में हुए संत विवाद पर दी प्रतिक्रिया
अपने संबोधन में चंद्रशेखर आजाद ने संभल हिंसा, यूजीसी नियमों में संशोधन और प्रयागराज में हुए संत विवाद जैसे मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को प्राथमिकता बनाकर जनता के बीच जा रही है. प्रयागराज की घटना को लेकर उन्होंने स्पष्ट कहा कि एक मानवतावादी के रूप में वह मानते हैं कि वहां सरकार की कार्रवाई गलत थी.
प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ पुलिस द्वारा किए गए व्यवहार पर टिप्पणी करते हुए आजाद ने कहा कि वैचारिक मतभेद अलग बात है, लेकिन धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संविधान सभी को देता है. उन्होंने दो टूक कहा कि वह मनुस्मृति और वर्ण व्यवस्था से जुड़े विचारों से सहमत नहीं हैं, लेकिन एक संविधानवादी होने के नाते अनुच्छेद 25 और 26 के तहत हर व्यक्ति की आस्था और धार्मिक अधिकारों का सम्मान जरूरी है. उन्होंने सरकार को मानवता और संविधान की मर्यादा में रहकर काम करने की नसीहत दी और विरोधियों से बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संविधान को पढ़ने की अपील की.
संभल हिंसा का जिक्र
संभल हिंसा का जिक्र करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जिन पुलिस अधिकारियों पर केस दर्ज करने के आदेश दिए गए, उनके बाद संबंधित जज का तबादला कर दिया जाना बेहद चिंताजनक है. आजाद ने आरोप लगाया कि रैली को कमजोर करने के उद्देश्य से प्रशासन ने आखिरी समय में कार्यक्रम स्थल बदला, लेकिन इसके बावजूद जनता का उत्साह कम नहीं हुआ. उनका दावा था कि प्रदेश के दलित, पिछड़े और कमजोर वर्गों का भरोसा अब आजाद समाज पार्टी पर टिक चुका है.
यूजीसी के नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध पर भी आजाद ने अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि इन नियमों का विरोध वही लोग कर रहे हैं, जिन्होंने वर्षों तक दलित और वंचित समाज के बच्चों को शिक्षा से दूर रखा. उन्होंने रोहित वेमुला और पायल तड़वी जैसे मामलों का उल्लेख करते हुए चेतावनी दी कि यदि सरकार दबाव में आकर इन नियमों को वापस लेती है, तो देश की बड़ी आबादी सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी. उन्होंने दोहराया कि अब किसी भी कीमत पर प्रतिभा और अधिकारों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा.


