दरकते पहाड़ों ने जोशीमठ के लोगों को पलायन के लिए किया मजबूर

उत्तराखंड का जोशीमठ लगातार धंसता जा रहा है राज्य सरकार के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है लेकिन सरकार हर पल लोगों के साथ है। अभी तक जोशीमठ में 700 से ज्यादा घरों में दरारें आ चुकी है कुछ घरों में दरारें इतनी बड़ी हो गई है कि प्रशासन को उन पर रेड क्रॉस लगाकर उन्हे रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया। रेड क्रॉस वाले घरों को तोड़ा भी जाएगा।

Vishal Rana
Edited By: Vishal Rana

उत्तराखंड का जोशीमठ लगातार धंसता जा रहा है राज्य सरकार के सामने एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है लेकिन सरकार हर पल लोगों के साथ है। अभी तक जोशीमठ में 700 से ज्यादा घरों में दरारें आ चुकी है कुछ घरों में दरारें इतनी बड़ी हो गई है कि प्रशासन को उन पर रेड क्रॉस लगाकर उन्हे रहने के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया। रेड क्रॉस वाले घरों को तोड़ा भी जाएगा।

इन सबके बीच ना चहाकर भी जोशीमठ के लोग वहां पलायन करने को मजबूर है। जिन घरों में लोगों का बचपन बीता, जहां से उनकी अच्छी-बुरी यादें जुड़ी है अब उन घरों को छोड़कर जाना लोगों के लिए कितना कठिन है इसका अंदाजा भी लगाना काफी मुश्किल है। मगर अब लोगों के सामने दूसरा कोई रास्ता भी नहीं बचा है।

प्रशासन द्वारा पूरे इलाके को लगातार खाली कराया जा रहा है सरकार द्वारा अभी तक 150 परिवारों को रिलीफ कैम्प में पहुंचाया जा चुका है। वहीं सरकार ने जोशीमठ के प्रभावित लोगों को हर संभव मदद करने का आश्वासन भी दिया है। जोशीमठ के हालात लगातार बिगड़े जा रहे है।

एक्सपर्ट के मुताबिक जोशीमठ में किए जा रहे अंधाधुंध 'विकास' जैसे सड़कों का जाल, बड़ी-बड़ी इमारतों का निर्माण और पहाड़ों को खोखला करना के चलते आज ये बड़ी मुसीबत जोशीमठ के लोगों को झेलनी पड़ रही है।

सदियों से उत्तराखंड के लोगों को पलायन करना पड़ रहा है चाहे वो विकास की कमी के चलते मूलभूत सुविधाओं के ना मिलने से या फिर ज्यादा विकास के चलते पैदा हुए ऐसे हालातों की वजह से। मुश्किल हमेशा आम जनता को ही झेलनी पड़ती है। जोशीमठ को लेकर कई एक्सपर्ट और भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि, भविष्य में जोशीमठ को बसाना काफी खतरनाक साबित हो सकता है।

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