उत्तर प्रदेश में जारी हुआ SIR का ड्राफ्ट, 2.89 करोड़ वोटर्स के नाम कटे, लखनऊ, प्रयागराज रहे सबसे आगे
उत्तर प्रदेश में SIR के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में 12.55 करोड़ नाम शामिल हैं. 2.89 करोड़ नाम मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट होने के कारण हटाए गए. दावे-आपत्तियों के बाद 6 मार्च को अंतिम सूची आएगी.

लखनऊः उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची मंगलवार को जारी कर दी गई. लोकभवन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) नवदीप रिणवा ने इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि नई ड्राफ्ट सूची में कुल 12.55 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं. इससे पहले राज्य में 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे, लेकिन एसआईआर प्रक्रिया के बाद 2.89 करोड़ नाम सूची से हटाए गए हैं.
किन कारणों से कटे इतने नाम
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार जिन 2.89 करोड़ नामों को हटाया गया है, उनमें कई श्रेणियां शामिल हैं. इनमें 46.23 लाख मतदाता ऐसे थे जिनका निधन हो चुका है. इसके अलावा 2.17 करोड़ मतदाता ऐसे पाए गए जो राज्य या जिले से स्थानांतरित हो चुके हैं. वहीं 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए, यानी एक ही व्यक्ति के नाम एक से अधिक बार दर्ज थे. कुल मिलाकर लगभग 18 प्रतिशत मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं.
दावे और आपत्तियों का मिलेगा मौका
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि सभी जिलों में ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन कर दिया गया है. अब आम नागरिकों और राजनीतिक दलों को इस पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलेगा. यह प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होकर 6 फरवरी तक चलेगी. इसके बाद 27 फरवरी तक सभी दावे और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा. अंतिम और संशोधित मतदाता सूची का प्रकाशन 6 मार्च को किया जाएगा.
इन जिलों में सबसे ज्यादा नाम कटे
ड्राफ्ट सूची के मुताबिक, सबसे ज्यादा मतदाताओं के नाम राजधानी लखनऊ में कटे हैं, जहां करीब 12 लाख नाम हटाए गए हैं. प्रयागराज में 11.56 लाख, कानपुर नगर में 9 लाख, आगरा में 8.36 लाख, गाजियाबाद में 8.18 लाख और बरेली में 7.14 लाख नाम सूची से बाहर हुए हैं. इसके अलावा मेरठ में 6.65 लाख, गोरखपुर में 6.45 लाख, सीतापुर में 6.23 लाख और जौनपुर में 5.89 लाख मतदाताओं के नाम कटे हैं.
प्रशासन का दावा, प्रक्रिया रही पारदर्शी
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया पिछले कुछ समय से चल रही थी. चुनाव आयोग ने इस दौरान दो बार समयसीमा बढ़ाई, ताकि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाए. प्रशासन का कहना है कि इस अतिरिक्त समय का इस्तेमाल जिला स्तर पर सत्यापन को और मजबूत करने के लिए किया गया. अब देखना यह होगा कि दावे और आपत्तियों के बाद अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम फिर से जुड़ते हैं और इसका चुनावी राजनीति पर क्या असर पड़ता है.


