उत्तराखंड में UCC लागू करने की तैयारी: कांग्रेस ने जताई आपत्ति, CM धामी बोले – यह कानून समाज में समानता लाएगा

उत्तराखंड, जहां 93 सालों बाद एक नया इतिहास बनने जा रहा है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐलान किया कि राज्य में समान नागरिक संहिता सोमवार से लागू हो जाएगी, जिससे यहां के सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और जिम्मेदारियां सुनिश्चित होंगी. वहीं, कांग्रेस ने इस कदम को बिना आम सहमति के 'प्रायोगिक परियोजना' बताया और सवाल उठाए. क्या यह कदम सभी राज्यों में समान रूप से लागू होगा? जानिए इस फैसले के पीछे की पूरी कहानी!

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Edited By: Aprajita

Uttarakhand Bold Step: उत्तराखंड में सोमवार से समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने जा रही है, जो राज्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम है. इस कानून को लागू करने वाला उत्तराखंड स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बन जाएगा. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस ऐतिहासिक कदम की घोषणा करते हुए कहा कि राज्य में इस कानून के लागू होने से सभी नागरिकों के अधिकारों और जिम्मेदारियों में समानता आएगी.

कांग्रेस ने किया विरोध

वहीं कांग्रेस पार्टी ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है. कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक सिंघवी ने इसे बिना आम सहमति के लागू किए जाने वाला पायलट प्रोजेक्ट करार दिया. उन्होंने कहा, 'क्या यह संभव है कि समान नागरिक संहिता सिर्फ एक राज्य में लागू हो? अगर इसे ‘समान’ कहा जाता है, तो फिर यह सभी राज्यों में समान रूप से लागू होना चाहिए, न कि केवल उत्तराखंड में.' सिंघवी ने यह भी कहा कि यदि राज्य केंद्रित किया जाए तो इससे एकरूपता का सवाल खड़ा होता है. उन्होंने इसे एक 'प्रायोगिक परियोजना' के रूप में देखा, जहां इसे बिना व्यापक सहमति के लागू किया जा रहा है.

सीएम धामी का जवाब

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस के विरोध का जवाब देते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता समाज में एकता और समानता लाएगी. इसके तहत सभी नागरिकों को समान अधिकार और जिम्मेदारियां दी जाएंगी, जिससे समाज में भेदभाव कम होगा और सबको बराबरी का हक मिलेगा. उन्होंने बताया कि UCC के लागू होने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं, और इसमें अधिकारियों की ट्रेनिंग तथा नियमों की मंजूरी भी शामिल है.

क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य यह है कि सभी नागरिकों को उनके धर्म, जाति, या लिंग के आधार पर भेदभाव के बिना समान अधिकार मिले. यह एक ऐसे कानून की पहल है जो भारत के विभिन्न धर्मों और समाजों को एक समान स्तर पर लाने का प्रयास करती है. इसके तहत परिवार, विवाह, संपत्ति अधिकार, तलाक, गोद लेने जैसे मुद्दों पर एक समान नियम लागू किए जाते हैं.

क्या UCC सिर्फ उत्तराखंड में ही लागू होगा?

यह सवाल भी उठाया गया है कि क्या UCC को सिर्फ उत्तराखंड में ही लागू किया जाएगा, या फिर यह दूसरे राज्यों में भी लागू होगा. कांग्रेस ने इसपर चिंता जताई है कि अगर यह सिर्फ उत्तराखंड में लागू होता है, तो इसे एक समान नागरिक संहिता नहीं कहा जा सकता.

उत्तराखंड सरकार ने इस कदम को समाज में समानता और एकता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना है, और देखते हैं कि यह राज्य में किस तरह से प्रभाव डालता है. UCC का यह कदम न केवल उत्तराखंड, बल्कि पूरे देश में चर्चाओं का विषय बन चुका है. इस फैसले के लागू होने के बाद, उत्तराखंड का यह कदम पूरे देश में एक मिसाल बन सकता है. 25 फरवरी तक महाकुंभ के दौरान यह मुद्दा और भी गरम होने की संभावना है, जब हजारों श्रद्धालु उत्तराखंड में इस नए कानून को लेकर अपनी राय देंगे.

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