योगी आदित्यनाथ का सदन में बड़ा बयान, 'हर कोई शंकराचार्य नहीं बन सकता'

यूपी विधानसभा में शुक्रवार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विस्तार से प्रतिक्रिया दी.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

उत्तर प्रदेश विधानसभा में शुक्रवार को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर पहली बार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विस्तार से प्रतिक्रिया दी. उन्होंने अपने संबोधन में परंपराओं की गरिमा, धार्मिक मर्यादाओं और कानून व्यवस्था को लेकर स्पष्ट रुख पेश किया.

शंकराचार्य विवाद पर क्या बोले सीएम योगी? 

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित परंपरा के तहत किसी भी पीठ पर आसीन होने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है. उनके अनुसार, संबंधित पीठ के योग्य उम्मीदवार के मंत्र और भाष्य को विद्वत परिषद से अनुमोदन मिलना चाहिए. इसके बाद ही अभिषेक की प्रक्रिया पूरी होती है और परंपरा द्वारा औपचारिक मान्यता दी जाती है. उन्होंने दो टूक कहा कि हर व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य घोषित नहीं कर सकता और न ही किसी भी पीठ के नाम पर मनमाने ढंग से गतिविधियां चला सकता है. धार्मिक पदों की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है.

सीएम योगी ने विपक्ष को घेरा 

मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर विपक्ष को भी घेरा. उन्होंने वाराणसी में हुई घटना का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि यदि संबंधित व्यक्ति को शंकराचार्य माना जाता है तो उस समय लाठीचार्ज और एफआईआर जैसी कार्रवाई क्यों की गई थी. उन्होंने विपक्ष पर नैतिकता के नाम पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया.

सुरक्षा व्यवस्था पर क्या बोले योगी? 

सुरक्षा व्यवस्था के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने कहा कि करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी वाले आयोजनों में प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस मार्ग से श्रद्धालु स्नान कर बाहर निकलते हैं, वहां से किसी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती. ऐसा करने से भगदड़ या अव्यवस्था की आशंका बढ़ सकती है, जो लोगों की जान जोखिम में डाल सकती है.

उन्होंने कहा कि जिम्मेदार व्यक्ति कभी ऐसा आचरण नहीं करेगा जिससे भीड़ प्रबंधन प्रभावित हो. सरकार कानून के शासन में विश्वास करती है और उसे लागू करना भी जानती है. साथ ही उन्होंने विपक्ष से अपील की कि इस मुद्दे पर जनता को गुमराह न किया जाए.

विधानसभा में दिए गए इस बयान के बाद संकेत मिल रहे हैं कि शंकराचार्य विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है. 

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