22 शहरों में जीरो पर आउट...BMC चुनाव में नहीं चला राज ठाकरे का करिश्मा, राजनीति का पूरी तरह सफाया

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद अब बीएमसी चुनाव में भी बीजेपी का कब्जा होता दिख रहा है. भाजपा नागपुर से लेकर पुणे तक में अपना मेयर बनाती दिख रही है. इसके विपरित ठाकरे ब्रदर्श की जोड़ी पूरी तरह से फेल होती दिख रही है. इतना ही नहीं 22 शहरों में पार्टी ने अपना खाता तक नहीं खोला है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

मुंबई : महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. मुंबई समेत राज्य की 29 नगर महापालिकाओं में हुए चुनावों के रुझान साफ संकेत दे रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी का शहरी राजनीति पर वर्चस्व मजबूत हो गया है. खासतौर पर बृहन्मुंबई महानगर पालिका यानी बीएमसी में बीजेपी पहली बार बहुमत के बेहद करीब नजर आ रही है, जिसे पार्टी के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि माना जा रहा है.

BMC में बीजेपी को बढ़त, शिवसेना गुट पिछड़े

आपको बता दें कि बीएमसी चुनाव की मतगणना जारी है और अब तक के रुझानों में बीजेपी 88 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. कड़े मुकाबले के बाद भी उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई है. बीजेपी और एकनाथ शिंदे की शिवसेना मिलकर अपने दम पर बहुमत हासिल करती दिख रही हैं. मुंबई की राजनीति में दशकों से प्रभावशाली रही ठाकरे ब्रदर्स की जोड़ी इस बार मतदाताओं को खास प्रभावित नहीं कर सकी.

बीजेपी गठबंधन का शानदार प्रदर्शन
राज्य की 29 नगर महापालिकाओं में कुल 2869 वार्डों के लिए चुनाव हुए हैं. रुझानों के अनुसार बीजेपी 1064 वार्डों में आगे चल रही है, जबकि मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना 282 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है. वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) सिर्फ 109 वार्डों तक सिमटी नजर आ रही है. अजित पवार की एनसीपी 113 सीटों पर आगे है, जबकि शरद पवार की एनसीपी महज 24 सीटों पर बढ़त बना सकी है. कांग्रेस 222 वार्डों में आगे चल रही है.

राज ठाकरे की मनसे को करारी शिकस्त
इन चुनावों में सबसे बड़ा झटका महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना को लगा है. राज ठाकरे की पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है. बीएमसी की 277 सीटों में से मनसे केवल 5 सीटों पर ही बढ़त बना पाई है. यह स्थिति तब है जब मनसे ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था. इसके बावजूद पार्टी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला.

मुंबई से बाहर भी मनसे का सफाया
मुंबई के अलावा राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में भी मनसे का हाल बेहद खराब रहा. कल्याण-डोंबिवली की 122 सीटों में मनसे केवल 4 सीटों पर आगे है. ठाणे की 131 सीटों में पार्टी सिर्फ एक सीट पर बढ़त बना सकी है. नवी मुंबई की 111 सीटों में भी मनसे को मात्र एक सीट पर सफलता मिलती दिख रही है. नासिक में, जहां कभी मनसे की सत्ता थी, वहां पार्टी सिर्फ 2 सीटों पर आगे चल रही है.

22 शहरों में मनसे का खाता तक नहीं खुला
पुणे नगर महापालिका की 165 सीटों में से जिन सीटों के रुझान आए हैं, उनमें मनसे का खाता भी खुलता नजर नहीं आ रहा है. पुणे के अलावा मीरा-भायंदर, वसई-विरार, भिवंडी, पनवेल, नागपुर, पिंपरी-चिंचवड़, संभाजीनगर, कोल्हापुर, सांगली-मिरज, सोलापुर, मालेगांव, जलगांव, धुले, इचलकरंजी, नांदेड़, परभणी, जलाना, लातूर, अमरावती, अकोला और चंद्रपुर जैसे 22 शहरों में मनसे एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई है.

राज ठाकरे की राजनीति पर बड़ा सवाल
हालांकि मनसे ने सभी 29 नगर महापालिकाओं में सभी सीटों पर उम्मीदवार नहीं उतारे थे, लेकिन जिन प्रमुख सीटों पर पार्टी ने पूरी ताकत झोंकी थी, वहां भी परिणाम निराशाजनक रहे. बीएमसी में मनसे ने 20 से 30 वार्डों में मजबूत दावेदारी की थी, लेकिन नतीजे केवल पांच सीटों तक सीमित रह गए. पुणे और नासिक जैसे पारंपरिक गढ़ों में भी पार्टी का कमजोर प्रदर्शन राज ठाकरे की राजनीतिक रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

शहरी महाराष्ट्र में बीजेपी की निर्णायक बढ़त
इन चुनावी रुझानों से यह साफ हो गया है कि शहरी महाराष्ट्र में बीजेपी ने खुद को सबसे मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित कर लिया है. मुंबई से लेकर नागपुर और पुणे तक बीजेपी के मेयर बनने की संभावना जताई जा रही है. वहीं ठाकरे परिवार और मनसे के लिए यह चुनाव आत्ममंथन का बड़ा अवसर साबित हो सकता है.

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