स्कूलों में भी अपनाया जाएगा UPI? केंद्र सरकार की ये है प्लानिंग

भारत सरकार ने स्कूल फीस के डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए सभी राज्यों और शिक्षा संस्थानों को UPI अपनाने का सुझाव दिया है. इससे अभिभावकों को सुविधा, स्कूलों को बेहतर प्रबंधन मिलेगा और डिजिटल साक्षरता बढ़ेगी. यह पहल शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और तकनीकी प्रगति को बढ़ावा देगी.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

कल्पना कीजिए कि स्कूल फीस जमा करने के लिए लंबी कतारों में खड़े होने की बजाय, आप बस एक यूपीआई कोड स्कैन करके तुरंत पेमेंट कर सकें. यह अब दूर की बात नहीं, बल्कि भारत सरकार की नई पहल का हिस्सा है.

शिक्षा मंत्रालय का डिजिटल भुगतान का आग्रह

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने पहली बार देश के सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और प्रमुख शिक्षा संस्थाओं जैसे एनसीईआरटी, सीबीएसई, केवीएस और एनवीएस को पत्र लिखकर यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणालियों को अपनाने का सुझाव दिया है. इसका मुख्य उद्देश्य स्कूलों के वित्तीय लेनदेन को आधुनिक बनाना और माता-पिता तथा छात्रों के लिए भुगतान प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना है.

जीवन सुगमता की पहल 

यह पहल भारत सरकार की व्यापक 'जीवन सुगमता' योजना के अनुरूप है, जिसका मकसद रोज़मर्रा की जीवन व्यवस्थाओं को सरल, पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाना है. डिजिटल इंडिया के इस युग में, यूपीआई की लोकप्रियता और सुलभता ने इसे स्कूल फीस भुगतान के लिए उपयुक्त विकल्प बना दिया है.

माता-पिता और छात्रों के लिए फायदे

डिजिटल भुगतान से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी. अब उन्हें नकद लेकर स्कूल जाना या लंबी कतारों में खड़ा होना नहीं पड़ेगा. साथ ही, डिजिटल लेनदेन की रसीद सुरक्षित रहती है, जिससे पेमेंट के रिकॉर्ड को संभालना आसान हो जाता है. इस तरह, फीस जमा करने की प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय बनती है.

स्कूलों के लिए बेहतर प्रबंधन

स्कूल प्रशासन के लिए यह बदलाव एक बड़े लाभ की तरह है. डिजिटल भुगतान से फीस की रसीदें स्वचालित रूप से रिकॉर्ड हो जाती हैं, जिससे त्रुटियों की संभावना कम होती है. इसके अलावा, ऑडिटिंग और वित्तीय निगरानी में भी आसानी होती है, जो स्कूल प्रबंधन को पारदर्शिता और जवाबदेही प्रदान करती है.

डिजिटल साक्षरता 

सरकार का मानना है कि यह कदम केवल भुगतान प्रणाली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे परिवारों की डिजिटल साक्षरता भी बढ़ेगी. डिजिटल उपकरणों और तकनीकों के साथ परिचय से बच्चे और उनके अभिभावक भविष्य के तकनीकी युग के लिए तैयार होंगे. यह पहल भारत को 2047 तक एक डिजिटल रूप से विकसित राष्ट्र बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है.

स्कूलों में डिजिटल परिवर्तन की नई लहर

कैश काउंटर से लेकर यूपीआई कोड तक, भारतीय स्कूल जल्द ही डिजिटल भुगतान के माध्यम से शिक्षा प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं. यह बदलाव न केवल प्रशासन को मजबूत बनाएगा, बल्कि छात्रों और परिवारों के लिए शिक्षा को और अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाएगा.

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