समंदर के हवाले की मां की अस्थियां, बेटी का इमोशनल ट्रिब्यूट वायरल

Emotional Viral Story: एक बेटी ने अपनी दिवंगत मां की अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए उनकी अस्थियों को एक कांच की बोतल में भरकर समुद्र में बहा दिया. साथ में एक नोट रखा– "मां को घूमने दो." यह अनोखी श्रद्धांजलि सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब ले आई.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

सोशल मीडिया इन दिनों एक ऐसी कहानी से भरा पड़ा है जो न सिर्फ दिल को छू जाती है बल्कि इंसानी जज़्बातों की गहराई भी दिखाती है. ये कहानी है एक बेटी की, जिसने अपनी दिवंगत मां की अधूरी ख्वाहिश को इस अनोखे और भावनात्मक तरीके से पूरा किया कि पूरी दुनिया उसे सलाम कर रही है.

यह भावुक कहानी ब्रिटेन के स्केगनेस (Skegness) शहर से सामने आई है. वहां की एक महिला की मां की लंबे समय से इच्छा थी कि वह दुनिया भर की यात्रा करें. लेकिन दुर्भाग्यवश, बीमारी और उम्र उन्हें ऐसा करने का अवसर नहीं दे पाए. उनकी मृत्यु के बाद, बेटी ने मां की इस अधूरी ख्वाहिश को एक अलग ही अंदाज़ में पूरा करने की ठानी.

राख को बोतल में भरकर भेजा सफर पर

बेटी ने अपनी मां की अस्थियों को एक पारदर्शी कांच की बोतल में बंद किया और उसमें एक भावनात्मक नोट भी रखा. इस बोतल को उसने समुद्र में प्रवाहित कर दिया, ताकि वो दुनिया के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंच सके. उस नोट में लिखा था – "मैं इस बोतल में अपनी मां की राख को दुनिया की सैर पर भेज रही हूं. अगर यह बोतल आपको मिलती है, तो कृपया इसे फिर से किसी नदी, झील या समुद्र में छोड़ दें और बताएं कि यह कहां पहुंची."

सोशल मीडिया पर भावनाओं का सैलाब

इस पोस्ट ने इंटरनेट पर तूफान ला दिया है. लोग इस बेटी की भावनाओं और उसकी संवेदनशीलता की जमकर तारीफ कर रहे हैं. किसी ने इसे 'दुनिया की सबसे खूबसूरत विदाई' कहा, तो किसी ने लिखा, 'यह सिर्फ एक बोतल नहीं, एक बेटी का प्यार और मां का सपना है.' एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, 'काश हर बेटी अपनी मां की आखिरी इच्छा को इतनी खूबसूरती से निभा पाती.'

पर्यावरण को लेकर भी उठा सवाल

हालांकि, कुछ लोगों ने यह सवाल भी उठाया कि समुद्र में बोतल फेंकना पर्यावरण के लिहाज से सही नहीं है. लेकिन अधिकांश लोगों ने बेटी की मंशा और भावना को समझते हुए इस अनोखी पहल का समर्थन किया. यह कहानी सिर्फ एक मां और बेटी के रिश्ते की नहीं, बल्कि उस प्यार की है जो मौत के बाद भी कम नहीं होता. यह एक मिसाल है कि सपने पूरे करने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती – न जीते जी और न मरने के बाद.

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