महाकुंभ के 'कबूतर वाले बाबा' का Video हुआ वायरल, 9 साल से सिर पर बिठा रहे घूम

Kabootar Wale Baba: प्रयागराज के महाकुंभ में एक कबूतर वाले बाबा का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वह पिछले 9 सालों से अपने सिर पर कबूतर को बैठाए हुए हैं. बाबा का मानना है कि यह कबूतर प्रेम और करुणा का प्रतीक है, जो सभी जीवों के प्रति दया और स्नेह का संदेश देता है.

Shivani Mishra
Edited By: Shivani Mishra

Kabootar Wale Baba: प्रयागराज के महाकुंभ में इस समय एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिल रहा है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है. यहां एक बाबा हैं, जिन्हें लोग 'कबूतर वाले बाबा' के नाम से जानते हैं. यह बाबा पिछले 9 वर्षों से अपने सिर पर एक कबूतर को बैठाए हुए हैं और उनकी यह अजीबो-गरीब परंपरा अब चर्चा का विषय बन गई है. सोशल मीडिया पर कबूतर वाले बाबा का वीडियो खूब वायरल हो रहा है और लोग उनकी इस अनोखी कहानी को लेकर उत्सुक हैं.

कबूतर वाले बाबा का नाम महंत राजपुरी जी महाराज है और वे जूना अखाड़े से जुड़े हुए हैं. उनके साथ रहने वाला कबूतर भी कोई सामान्य कबूतर नहीं, बल्कि इसने उनके साथ पिछले 9 सालों से अपना रिश्ता कायम किया हुआ है. बाबा का मानना है कि यह कबूतर प्रेम और करुणा का प्रतीक है, जो सभी जीवों के प्रति दया और स्नेह का संदेश देता है.

महाकुंभ पहुंचे कबूतर वाले बाबा

कबूतर वाले बाबा का कहना है कि उनका यह कबूतर हर वक्त उनके साथ रहता है, चाहे वह खाते-पीते हों, सोते या जागते हों. बाबा के अनुसार, "कबूतर प्रेम और सद्भाव का प्रतीक है. यह सभी जीवों के प्रति करुणा और दया का भाव सिखाता है." उन्होंने आगे कहा, "जीवित प्राणियों की सेवा करना सबसे बड़ा कर्तव्य माना जाता है, जो मैं कर रहा हूं. सभी जीवों के प्रति दया रखना चाहिए और उनकी देखभाल हमारी जिम्मेदारी है."

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

बाबा के इस अनोखे अनुभव को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. वीडियो में देखा जा सकता है कि कबूतर बाबा के सिर पर आराम से बैठा हुआ है. यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल रहा है और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है. वीडियो को सबसे पहले ट्विटर (X) पर @LekhramSah21745 नाम के अकाउंट से पोस्ट किया गया था, जिसे अब हजारों लोगों ने देखा और साझा किया.

कौन हैं कबूतर वाले बाबा?

राजपुरी जी महाराज, जो जूना अखाड़े के महंत हैं, अपनी विशेष पहचान के लिए मशहूर हैं. उनका मानना है कि जीवन का उद्देश्य केवल खुद के लिए नहीं, बल्कि सभी जीवों की सेवा करना है. बाबा के कबूतर का नाम हरि पुरी है और उनका कहना है कि यह कबूतर उनके साथ हमेशा रहेगा, क्योंकि यह उनके लिए सिर्फ एक पक्षी नहीं, बल्कि एक साथी की तरह है.

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