असम, केरल और पुडुचेरी में मतदान शुरू, सत्ता के लिए एनडीए और इंडिया गठबंधन आमने-सामने
असम, केरल और पुडुचेरी में आज मतदान की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जहां सत्ता के लिए एनडीए और इंडिया गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है. कड़ी सुरक्षा और विशेष व्यवस्थाओं के बीच मतदाता अपने वोट से सरकार का भविष्य तय कर रहे हैं.

नई दिल्ली: असम, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान आज सुबह 7 बजे से शुरू हो गया, जहां राजनीतिक दलों के बीच सत्ता की जंग तेज हो गई है. तीनों राज्यों में मतदाता उत्साह के साथ अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, वहीं प्रशासन ने निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं.
मतदान प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम, वेबकास्टिंग और मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं. मतदान शाम 6 बजे तक जारी रहेगा, जिसके बाद सभी की नजरें नतीजों पर टिक जाएंगी.
असम में एनडीए बनाम विपक्षी गठबंधन की सीधी टक्कर
असम में चुनावी मुकाबला भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के बीच केंद्रित है. एनडीए में भाजपा के साथ असम गण परिषद (एजीपी) और अन्य क्षेत्रीय दल शामिल हैं, जबकि विपक्षी मोर्चे में कांग्रेस के साथ एआईयूडीएफ और रायजोर दल जैसी पार्टियां शामिल हैं, जिससे कई सीटों पर बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है.
126 सदस्यीय विधानसभा के लिए कुल 722 उम्मीदवार मैदान में हैं और 31,490 मतदान केंद्रों पर 2.5 करोड़ से अधिक मतदाता वोट डालने के पात्र हैं.
सरमा बनाम गोगोई: सत्ता की बड़ी लड़ाई
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भाजपा के लिए लगातार तीसरी बार जीत हासिल करने की कोशिश में हैं, जबकि गौरव गोगोई के नेतृत्व में कांग्रेस राज्य में सत्ता वापसी का सपना देख रही है.
चुनावी प्रचार के दौरान पहचान की राजनीति और शासन से जुड़े मुद्दे केंद्र में रहे. मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को लेकर विवाद भी सामने आया, जिसमें विपक्ष ने मताधिकार से वंचित करने के आरोप लगाए.
अवैध घुसपैठ का मुद्दा भी चर्चा में रहा, जहां भाजपा ने इसे प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया, वहीं विपक्ष ने सत्तारूढ़ दल पर ध्रुवीकरण का आरोप लगाया.
प्रमुख सीटों पर टिकी नजरें
जलुकबारी सीट पर मुख्यमंत्री सरमा छठी बार जीत दर्ज करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं जोरहाट सीट से लोकसभा सांसद गौरव गोगोई पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं.
इसके अलावा बदरुद्दीन अजमल की एआईयूडीएफ, अखिल गोगोई की रायजोर दल और असम जातीय परिषद जैसी पार्टियां भी कई क्षेत्रों में मुकाबले को दिलचस्प बना रही हैं.
केरल में पारंपरिक द्विध्रुवी मुकाबला
केरल में 140 सीटों के लिए 883 उम्मीदवार मैदान में हैं और 2.71 करोड़ मतदाता चुनावी नतीजों का फैसला करेंगे. यहां मुकाबला सत्तारूढ़ वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) के बीच है.
एलडीएफ लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रहा है, जबकि यूडीएफ बेरोजगारी, महंगाई और वित्तीय कुप्रबंधन जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेर रहा है.
बड़ी हस्तियों पर सबकी नजर
मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन कन्नूर के धर्मदम सीट से चुनाव लड़ रहे हैं, जो सीपीआई (एम) का मजबूत गढ़ माना जाता है. विपक्ष के नेता वी.डी. सतीशान परवूर सीट से अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में हैं.
नेमोम सीट पर भी खास ध्यान है, जहां भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर मैदान में हैं. वहीं केके शैलजा को पेरावूर सीट से उतारा गया है, जो पारंपरिक रूप से कांग्रेस का गढ़ रही है.
मतदान के लिए विशेष इंतजाम
केरल में 30,495 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां 1.46 लाख अधिकारी और 76,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. गर्मी को देखते हुए मतदाताओं के लिए पानी, पंखे और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं.
पुडुचेरी में त्रिकोणीय मुकाबले की आहट
पुडुचेरी में 30 विधानसभा सीटों पर 294 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करीब 9.5 लाख मतदाता करेंगे. यहां एनडीए गठबंधन, कांग्रेस-डीएमके के नेतृत्व वाले इंडिया ब्लॉक और अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के बीच मुकाबला दिलचस्प हो गया है.
मुख्यमंत्री एन रंगासामी दो सीटों - थट्टनचावडी और मंगलम से चुनाव लड़ रहे हैं और सत्ता बनाए रखने की कोशिश में हैं.
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और निगरानी
प्रशासन ने 200 से अधिक मतदान केंद्रों को संवेदनशील घोषित किया है. नकदी और शराब वितरण जैसे मामलों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है.
महिलाओं द्वारा संचालित मतदान केंद्रों के साथ बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं.
उपचुनाव और परिणाम की तारीख
इन चुनावों के साथ ही गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा की पांच विधानसभा सीटों पर उपचुनाव भी हो रहे हैं, जो मौजूदा विधायकों के निधन के कारण जरूरी हुए हैं.
तीनों राज्यों में मिलाकर तीन करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे. चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे.

