बजट 2026: कितने महीनों में तैयार होता है बजट, क्या है वो गुप्त ब्लू शीट जो सबको चौंका देती है
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को बजट पेश करेंगी। हलवा सेरेमनी के बाद अधिकारी लॉकडाउन में हैं। ब्लू शीट बजट का मुख्य दस्तावेज है। इसमें महत्वपूर्ण आंकड़े होते हैं। बजट बनाने में 5 महीने लगते हैं। गोपनीयता के लिए कड़े नियम हैं। 1950 में लीक हुआ था बजट।

ब्लू शीट बजट का सबसे गुप्त कागज है।इसमें आय-व्यय के बड़े आंकड़े लिखे होते हैं।इसे बजट की रीढ़ कहते हैं।वित्त मंत्री इसे बाहर नहीं ले जा सकतीं।संयुक्त सचिव इसे संभालते हैं।1950 में लीक हो गया था बजट।तब से सख्त सुरक्षा लागू की गई।अब हाइटेक निगरानी है।अधिकारी बाहर नहीं जा सकते।बजट पेश होने तक कैद जैसे रहते हैं।यह शीट बजट का खाका बनाती है।कई फैसले इसी पर आधारित होते हैं।गोपनीयता बनी रहे इसलिए ब्लू रंग इस्तेमाल होता है।
बजट लीक होने पर क्या हुआ?
1950 में बजट दस्तावेज लीक हो गए।राष्ट्रपति भवन से प्रेस में चले गए।पूरे देश में हंगामा मचा।सरकार ने सबक लिया।लॉक-इन सिस्टम शुरू किया।अधिकारी अलग-थलग रहते हैं।प्रिंटिंग मिंटो रोड शिफ्ट की।अब नॉर्थ ब्लॉक में रहते हैं।बाहरी दुनिया से कटे।फोन तक इस्तेमाल नहीं।यह सब गोपनीयता के लिए है।पिछले सालों में कोई लीक नहीं हुआ।सुरक्षा अब हाइटेक है।कैमरे और गार्ड्स लगे हैं।बजट सुरक्षित रहता है।
बजट कैसे बनता है स्टेप बाय स्टेप?
बजट बनाने की प्रक्रिया लंबी है।सितंबर से शुरू होती है।वित्त मंत्रालय का बजट डिवीजन संभालता है।पहले खर्च का अनुमान लगाते हैं।मंत्रालयों से जानकारी लेते हैं।राज्यों और विभागों से डेटा आता है।फिर एनालिसिस होती है।करीब 5 महीने लगते हैं।कई चरणों से गुजरता है।अर्थशास्त्रियों से सलाह ली जाती है।टैक्स छूट पर फैसला होता है।आखिर में वित्त मंत्री का भाषण तैयार होता है।बजट पेश होने से पहले कैबिनेट मंजूरी लेती है।
पहला चरण क्या होता है?
पहले चरण में खर्च का आकलन करते हैं।केंद्रीय मंत्रालयों से डेटा मंगाते हैं।राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से भी।स्वायत्त संस्थानों से जानकारी आती है।सैन्य बलों की जरूरतें देखी जाती हैं।नए वित्त वर्ष के लिए प्लान बनता है।खर्च और जरूरतों का हिसाब लगता है।यह बेसिक स्टेप है।बिना इसके आगे नहीं बढ़ते।टीम सब एनालाइज करती है।कमियां ढूंढती है।फिर आगे बढ़ते हैं।यह चरण महत्वपूर्ण है।
दूसरे और तीसरे चरण में क्या?
दूसरे चरण में व्यापारियों से बात होती है।अर्थशास्त्रियों और किसानों से चर्चा।सिविल सोसायटी शामिल होती है।जरूरतें समझते हैं।आमदनी और खर्च का ब्यौरा तैयार।अनुमानित कमाई लगाते हैं।राज्यों से बात करके टैक्स फैसले लेते हैं।बैंकर्स की सलाह ली जाती है।आर्थिक मदद पर विचार होता है।यह चरण रीयल ग्राउंड पर आधारित है।लोगों की जरूरतें देखी जाती हैं।फिर बजट का शेप बनता है।
चौथा चरण क्यों खास है?
चौथा चरण बजट को फाइनल करता है।वित्त मंत्रालय भाषण तैयार करता है।विवादित मुद्दों पर सलाह लेते हैं।बड़ी टीम मिलकर काम करती है।कई फैसले लेती है।लेकिन सब वित्त मंत्री के नाम से जाते हैं।यह अंतिम शेप देता है।कैबिनेट मीटिंग होती है।प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में।मंजूरी मिलती है।फिर सदन में पेश होता है।सीतारमण का 9वां बजट होगा।
बजट पेश होने के बाद क्या?
पांचवें चरण में बजट पेश होता है।सदन में पढ़ा जाता है।लोगों को पता चलता है।आय-व्यय का ब्यौरा आता है।सरकार कहां पैसा लगाएगी।कहां से आएगा।यह सब ब्लू शीट से जुड़ा होता है।गोपनीयता सफल रहती है।अब डिजिटल बजट है।पेपरलेस हो गया।लेकिन परंपराएं बनी हैं।हलवा सेरेमनी से शुरू होता है।अधिकारी खुश होते हैं।बजट देश की दिशा तय करता है


