Gold Silver Rate : अचानक 85,000 सस्ती हुई चांदी, औंधे मुंह गिरी सोने की कीमत

सोने और चांदी के भाव में शुक्रवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली है. चांदी का भाव पिछले 24 घंटे में 85,000 रुपये तक कम हुआ है. वहीं अगर हम सोने की बात करें तो सोने के भाव में 25000 रुपये से ज्यादा की गिरावट आई है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : शुक्रवार को सोने और चांदी के बाजार में अचानक तेज गिरावट ने निवेशकों को चौंका दिया है. लगातार कई दिनों तक रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद इन कीमती धातुओं में भारी मुनाफावसूली देखी गई, जिससे MCX पर कीमतें धड़ाम से नीचे आईं. गुरुवार को चांदी ने प्रति किलो 4,20,048 रुपये का नया सर्वकालिक उच्च स्तर बनाया था, जबकि सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया था. लेकिन 30 जनवरी को स्थिति पूरी तरह पलट गई, जहां चांदी में 80,000 रुपये तक की गिरावट दर्ज हुई और सोना भी 25,000 रुपये से अधिक सस्ता हो गया. यह गिरावट इतनी तेज थी कि बाजार में अफरा-तफरी मच गई, और कई निवेशकों ने अपने मुनाफे को सुरक्षित करने के लिए बिकवाली की.

68,000 से 85,000 रुपये तक की कमी

आपको बता दें कि गुरुवार शाम तक बाजार में जबरदस्त उत्साह था. चांदी ने कुछ हफ्तों में ही 3 लाख से 4 लाख रुपये प्रति किलो का स्तर पार कर लिया था, जबकि सोने में भी लगातार नई ऊंचाइयां बनीं. यह तेजी वैश्विक अनिश्चितताओं, कमजोर डॉलर और सुरक्षित निवेश की मांग से प्रेरित थी. लेकिन शुक्रवार सुबह जैसे ही कारोबार शुरू हुआ, बिकवाली का दबाव बढ़ गया. MCX पर मार्च वायदा चांदी की कीमत शुरुआत में ही 4% से अधिक गिरकर 3.83 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गई, और दिन भर में यह और नीचे लुढ़कती चली गई. कुछ रिपोर्टों के अनुसार, चांदी 3.35 लाख से 3.51 लाख रुपये के बीच पहुंच गई, यानी पीक से 68,000 से 85,000 रुपये तक की कमी.

सोने की फरवरी या अप्रैल वायदा भी 6-9% तक टूटकर 1.60 लाख से 1.67 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गई. यह गिरावट घरेलू बाजार तक सीमित नहीं रही, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कॉमेक्स पर सोना और चांदी में 2-10% की कमी देखी गई.

ट्रंप के बयान ने बाजार को प्रभावित किया 
एक्सपर्ट्स इस गिरावट को मुख्य रूप से मुनाफावसूली का नतीजा मान रहे हैं. पिछले दिनों की लगातार तेजी से बाजार ओवरबॉट हो गया था, और निवेशक अपने भारी मुनाफे को लॉक करने के लिए बेचने लगे. चांदी में शॉर्ट सेलिंग भी बढ़ी, जिससे दबाव और गहरा गया. इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर में मजबूती आई, जो कीमती धातुओं के लिए नकारात्मक संकेत है. डॉनाल्ड ट्रंप के बयान ने भी बाजार को प्रभावित किया, जहां उन्होंने फेडरल रिजर्व चेयरमैन जेरोम पॉवेल की जगह किसी अपने पसंदीदा व्यक्ति को नियुक्त करने की बात कही.

रिपोर्टों में केविन वार्श जैसे हॉकिश उम्मीदवार का नाम सामने आया, जिससे फेड की नीति में सख्ती की आशंका बढ़ी और डॉलर मजबूत हुआ. वैश्विक तनावों में कुछ कमी भी आई, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग घटी. भारत में यह सब मिलकर एमसीएक्स पर भारी बिकवाली का कारण बना.

गोल्ड और सिल्वर ETF में भी भारी नुकसान
कीमतों में इस तेज गिरावट का असर गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ पर भी पड़ा. शेयर बाजार में सिल्वर ईटीएफ जैसे आईसीआईसीआई सिल्वर ईटीएफ 20% से अधिक टूट गए, निप्पॉन इंडिया सिल्वर ईटीएफ में 18-19% की कमी आई, जबकि टाटा सिल्वर ईटीएफ भी 13% गिरा. गोल्ड ईटीएफ में भी 9-10% तक की गिरावट दर्ज हुई, जैसे टाटा गोल्ड ईटीएफ 9.16% और निप्पॉन इंडिया गोल्ड ईटीएफ 10.50% नीचे आए.

यह गिरावट निवेशकों के लिए झटका थी, क्योंकि ईटीएफ के जरिए अप्रत्यक्ष निवेश करने वाले भी प्रभावित हुए. हालांकि, कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह सुधार अस्थायी है और लंबी अवधि में तेजी बरकरार रह सकती है, क्योंकि जनवरी में ही दोनों धातुओं में भारी उछाल आया था.

फिर ऊपर जा सकती हैं कीमतें 
यह घटना बाजार की अस्थिरता को दर्शाती है, जहां रिकॉर्ड तेजी के बाद सुधार सामान्य है. विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरबॉट स्थिति में ऐसे पुलबैक स्वस्थ होते हैं, और अगर वैश्विक अनिश्चितताएं बनी रहें तो कीमतें फिर ऊपर जा सकती हैं. लेकिन निकट भविष्य में ट्रंप प्रशासन की फेड नीति और डॉलर की गति पर नजर रखनी होगी. निवेशकों के लिए यह मौका हो सकता है कि गिरावट के दौरान खरीदारी करें, लेकिन जोखिम भी ज्यादा है. कुल मिलाकर, 30 जनवरी की यह गिरावट सोने-चांदी के बाजार में एक यादगार दिन साबित हुई, जहां रिकॉर्ड से गिरावट ने सबको हैरान कर दिया.

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