बलूचिस्तान में पाक सेना का खूनी खेल: 41 मासूमों का कत्ल, भारत को बदनाम करने की साजिश

पाकिस्तान की सेना ने बलूचिस्तान में दो अभियानों में 41 बलूच नागरिकों को मार गिराया। उन्हें भारत समर्थित आतंकवादी बताया गया, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं। यह बलूचों पर जारी जुल्म की नई कड़ी है, जहां हजारों लोग लापता हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

बलूचिस्तान पाकिस्तान का वो इलाका है जहां सालों से आजादी की मांग हो रही है। पाक सेना यहां के लोगों को कुचलने में लगी है। हाल ही में दो जगहों पर हमले हुए। हरनाई और पंजगुर जिलों में। सेना कहती है कि ये ऑपरेशन खुफिया जानकारी पर थे। लेकिन सच क्या है? बलूच लोग इसे कत्लेआम कहते हैं। वे कहते हैं कि सेना निर्दोषों को मार रही है,  भारत का नाम लेकर अपनी गलतियां छिपा रही है। 

अपनों के लिए भटक रहे हजारों लोग 

हजारों परिवार अपनों की तलाश में भटक रहे हैं। कई साल पहले सेना घरों से लोगों को उठा ले जाती है। फिर कोई खबर नहीं मिलती। यह दर्द बलूचिस्तान का रोज का सच है। अब 41 मौतों ने आग में घी डाल दिया है। दुनिया की नजरें अब पाकिस्तान पर हैं। क्या यह जुल्म रुकेगा?पाक सेना ने क्या दावा किया है? सेना की मीडिया विंग आईएसपीआर ने बयान जारी किया। उसने कहा कि 29 जनवरी को ऑपरेशन हुए। हरनाई में 30 लोग मारे गए। उन्हें फितना-अल-ख्वारिज कहा। मतलब तालिबान से जुड़े।

लेकिन साथ में भारत का नाम जोड़ा

कहा कि भारत समर्थन दे रहा है। पंजगुर में 11 मौतें हुईं। वहां से हथियार बरामद होने का दावा। 15 दिसंबर 2025 की बैंक डकैती से जुड़े। सेना कहती है कि ये आतंकवादी थे। कई हमलों में शामिल। लेकिन सबूत कहां हैं? सिर्फ बातें। बलूच संगठन इसे झूठ कहते हैं। वे कहते हैं कि सेना अपनी नाकामियां छिपा रही है। भारत को बदनाम कर रही है। पाकिस्तान में अंदरूनी समस्याएं हैं। लेकिन दोष बाहर डालते हैं। यह तरीका पुराना है। क्या कभी सच सामने आएगा?हरनाई में क्या हुआ था?हरनाई जिले के बाहर इलाके में सूचना मिली। सेना ने घेरा डाला। भारी गोलीबारी हुई। 

30 बलूच मारे गए

सेना ने कहा कि ये ख्वारिज थे। भारत की मदद से काम कर रहे। हथियार और गोला-बारूद मिले। सब नष्ट कर दिए। लेकिन स्थानीय लोग कहते हैं कि ये आम नागरिक थे। कोई आतंक नहीं। सेना ने बिना सोचे हमला किया। परिवारों का रोना सुनाई दे रहा है। बच्चे, बूढ़े, जवान सब प्रभावित। बलूचिस्तान में ऐसे ऑपरेशन आम हैं। हर बार यही कहानी। भारत का आरोप। कोई जांच नहीं। पाक सरकार चुप। अंतरराष्ट्रीय संगठन क्या कर रहे हैं? मानवाधिकार की बातें कहां गईं? यह सवाल हर बलूच के मन में है। क्या न्याय मिलेगा?पंजगुर में सेना की कार्रवाई कैसी रही?

सेना ने इसे भारत समर्थित बताया

पंजगुर में भी खुफिया इनपुट पर ऑपरेशन। 11 लोग मारे गए। सेना ने इन्हें भारत समर्थित बताया। हथियार, पैसे बरामद। बैंक डकैती से जुड़े। कहते हैं कि ये पहले भी हमलों में शामिल थे। लेकिन सबूत zéro. बलूच नेता कहते हैं कि यह दमन है। आजादी की आवाज दबाने का तरीका। पाकिस्तान बलूचिस्तान को अपना हिस्सा मानता है। लेकिन वहां के लोग खुश नहीं। संसाधन लूटे जा रहे हैं। विकास नहीं हो रहा। सेना का डर हर जगह। स्कूल, अस्पताल कम। मौतें ज्यादा। यह असमानता की कहानी है। भारत को क्यों घसीटते हैं? क्योंकि अपनी कमजोरी छिपानी है। दुनिया को गुमराह करना है। 

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