पहले सत्ता पर कब्जा, अब वेनेजुएला के तेल को पूरी तरह से कंट्रोल करेगा अमेरिका...जानें रूस,चीन और भारत पर क्या होगा असर ?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल पर विशेष नियंत्रण स्थापित किया है. अमेरिकी ट्रेजरी ने जनरल लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत केवल अमेरिकी कंपनियां PDVSA से तेल खरीद, बिक्री, रिफाइनिंग और स्टोरेज कर सकती हैं. यह कदम रूस, चीन और अन्य देशों को प्रभावित करेगा. ट्रंप का लक्ष्य उत्पादन बढ़ाना, कीमत नियंत्रित करना और अमेरिकी कंपनियों को लाभ पहुंचाना है.

नई दिल्ली : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के बाद तेल क्षेत्र में बड़ा कदम उठाया है. अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने हाल ही में एक जनरल लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत केवल अमेरिकी कंपनियों को ही वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA से कच्चा तेल और उससे बने उत्पाद खरीदने की अनुमति है. यह लाइसेंस तेल की खरीद, बिक्री, स्टोरेज, परिवहन और रिफाइनिंग जैसी गतिविधियों को कवर करता है, बशर्ते ये सभी काम अमेरिकी कंपनियों के माध्यम से ही किए जाएं.
आपको बता दें कि लाइसेंस के अनुसार, केवल वे अमेरिकी संस्थाएं इस व्यापार में भाग ले सकती हैं, जो 29 जनवरी 2025 से पहले अमेरिकी कानूनों के तहत स्थापित हैं. इसका मतलब यह है कि गैर-अमेरिकी कंपनियों को वेनेजुएला के तेल से जुड़े किसी भी लेनदेन में शामिल होना मुश्किल हो जाएगा. ट्रंप प्रशासन का यह कदम स्पष्ट रूप से उन देशों को निशाना बनाता है जो वेनेजुएला के तेल में पहले शामिल रहे हैं, जैसे रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया और क्यूबा.
रूस, चीन और भारत पर असर
कैरेबियन सागर में अमेरिकी निगरानी
अमेरिका ने कैरेबियन सागर में तेल टैंकरों की निगरानी बढ़ा दी है. ट्रंप प्रशासन की निगरानी के चलते रूस और चीन के टैंकरों के लिए वेनेजुएला से तेल ले जाना अब मुश्किल होगा. गैर-अमेरिकी कंपनियों को अपनी खरीद-बिक्री की विस्तृत रिपोर्ट अमेरिका को देना अनिवार्य होगा, जिससे अमेरिकी नियंत्रण और बढ़ जाएगा.
ट्रंप का तेल नीति का उद्देश्य
ट्रंप लंबे समय से वेनेजुएला के तेल पर नियंत्रण की बात कर रहे थे. जनवरी 2026 में मादुरो की गिरफ्तारी के बाद ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल का अनिश्चित काल तक नियंत्रण रखेगा, इसका व्यापार करेगा और राजस्व अमेरिकी ट्रेजरी में जमा होगा. उनका लक्ष्य उत्पादन बढ़ाना, तेल की कीमतों को नियंत्रित करना और अमेरिकी कंपनियों को लाभ पहुंचाना है. ट्रंप ने $100 बिलियन अमेरिकी निवेश की भी मांग की ताकि अमेरिका को इस रणनीति से अधिकतम लाभ मिल सके.


