अब चांदी बन गया नया सोना! दुनिया के 4 देशों के पास छिपा है चांदी का खजाना, भारत का भंडार देखकर उड़ जाएंगे होश
चांदी पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बनती जा रही है. 4 ऐसे देश है, जिनके पास चांदी के सबसे बड़े भंडार है. क्या इस लिस्ट में भारत का नाम है या नहीं, जानिए विस्तार से.

नई दिल्ली: दुनिया में चांदी का भंडार तेजी से महत्वपूर्ण हो रहा है. वैश्विक तनाव, डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश और औद्योगिक मांग के कारण कई देश अब चांदी को भी रणनीतिक संपत्ति मानकर जमा कर रहे हैं. पहले मुख्य रूप से सोना ही सरकारी भंडार में रखा जाता था, लेकिन 2025-26 में चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं और देशों के बीच इसकी होड़ बढ़ गई है.
सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और AI जैसी तकनीकों में चांदी की भारी जरूरत है, जिससे इसकी मांग बढ़ी है. साथ ही, कुछ देशों के निर्यात प्रतिबंधों ने भी कीमतों को प्रभावित किया है.
चांदी के सबसे बड़े भंडार वाले 4 देश
दुनिया में चांदी के प्राकृतिक भंडार (reserves) मुख्य रूप से खनन क्षमता पर आधारित है. यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, ये चार देश सबसे आगे हैं. ये देश न सिर्फ भंडार में आगे हैं, बल्कि उत्पादन और उपयोग में भी मजबूत हैं.
1. पेरू - लगभग 1.4 लाख मीट्रिक टन चांदी के भंडार. यह वैश्विक कुल का करीब 22% है. पेरू चांदी का बड़ा उत्पादक भी है, लेकिन अब भंडार को रणनीतिक रूप से देखा जा रहा है.
2. ऑस्ट्रेलिया - करीब 94,000 मीट्रिक टन. यहां खनन कंपनियां मजबूत है और भंडार सुरक्षित है.
3. रूस - लगभग 92,000 मीट्रिक टन. रूस ने हाल में चांदी को सरकारी फंड में शामिल करना शुरू किया है. यह सोने के साथ मिलाकर कीमती धातुओं की खरीद बढ़ा रहा है, ताकि डॉलर पर निर्भरता कम हो.
4. चीन - करीब 70,000 मीट्रिक टन. चीन सोलर और EV सेक्टर के लिए बड़ा रणनीतिक स्टॉक बना रहा है. यहां हजारों टन चांदी इंडस्ट्री के लिए सुरक्षित रखी गई है.
भारत में चांदी का कितना भंडार?
भारत के पास करीब 8,000 मीट्रिक टन प्राकृतिक खनिज भंडार हैं लेकिन घरेलू स्तर पर चांदी का सबसे बड़ा संग्रह है. भारतीय परिवारों के पास गहनों, बर्तनों और सिक्कों के रूप में अनुमानित 2.5 लाख मीट्रिक टन (2 लाख 50 हजार टन) चांदी है. यह दुनिया के किसी भी देश के प्राकृतिक भंडार से ज्यादा है, यहां तक कि पेरू के 1.4 लाख टन से भी कई ज्यादा अधिक है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास मुख्य रूप से सोना है, लेकिन सरकार सोलर पैनल और EV के लिए चांदी के आयात और स्टॉक पर फोकस कर रही है. हाल में नियम बदले गए हैं, जिससे चांदी को लोन के लिए कोलेटरल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है. इससे घरेलू चांदी का औपचारिक उपयोग बढ़ सकता है.
सोने के साथ चांदी जुटाने की क्यों मची होड़?
चांदी अब सिर्फ गहने नहीं, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बन गई है. जिसका मुख्य कारण है औद्योगिक मांग में उछाल, सोलर सेल, इलेक्ट्रिक वाहन और AI में चांदी की जरूरत. सोलर पैनल में चांदी की पेस्ट का इस्तेमाल होता है, जिससे ग्रीन एनर्जी की मांग बढ़ी है.
सोने से जुड़ाव- सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर (5,500 डॉलर/औंस के आसपास) पर हैं, जिसके कारण चांदी सस्ता और सुरक्षित निवेश विकल्प बनती जा रही है.
मुद्रा स्थिरता- डॉलर में उतार-चढ़ाव और वैश्विक तनाव (रूस-यूक्रेन युद्ध, अमेरिका-चीन टैरिफ) के खिलाफ चांदी हार्ड एसेट के रूप में काम कर रही है.
सरकारी रणनीति- रूस और सऊदी अरब जैसे देश चांदी खरीद रहे हैं. चीन ने निर्यात पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिससे सप्लाई टाइट हुई है. वहीं अमेरिका ने भी चांदी को क्रिटिकल मिनरल घोषित किया है.


