भारत बना रहेगा रफ्तार का राजा...अर्थव्यवस्था, वित्त वर्ष 2026 में 7.6 % की दर से बढ़ने का अनुमान

वैश्विक दबाव और अमेरिकी निर्यात में रुकावट के बीच भारत की अर्थव्यवस्था पिछले वित्त वर्ष के 6.5 % की तुलना में 7.4 फीसदी से तेजी से बढ़ने की संभावना है. देश की अर्थव्यवस्था में यह उछाल भारत के मजबूद निवेश और निवेशकों के भरोसे को दिखाता है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026 में शानदार वृद्धि की ओर बढ़ रही है. 7 जनवरी को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस वित्त वर्ष में जीडीपी 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान है, जो पिछले वित्त वर्ष के 6.5 प्रतिशत की तुलना में तेज़ उछाल दर्शाता है. यह वृद्धि वैश्विक दबाव और अमेरिकी निर्यात में रुकावट के बावजूद आई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत के मजबूत निवेश और घरेलू विश्वास ने अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान की है. नीति बदलाव, बढ़ती उपभोक्ता मांग और घरेलू बुनियादी ढांचे की मजबूती ने भी इस विकास में योगदान किया है.

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर का योगदान

आपको बता दें कि अर्थव्यवस्था में इस तेजी को मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने प्रमुख रूप से सहारा दिया है. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा जारी राष्ट्रीय आय के पहले एडवांस अनुमानों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में 7 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है. वहीं, सर्विस सेक्टर ने भी रियल GVA में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दिखाते हुए अर्थव्यवस्था में स्थिर योगदान दिया. हालांकि, एग्रीकल्चर और यूटिलिटी सेवाओं में सामान्य वृद्धि बनी रहने का अनुमान है, जिससे अर्थव्यवस्था का संतुलित विकास सुनिश्चित हुआ है.

नॉमिनल जीडीपी में बढ़ोतरी
MoSPI ने यह भी अनुमान लगाया है कि मौजूदा कीमतों पर नॉमिनल जीडीपी में इस वित्त वर्ष 8 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिलेगी. इस डेटा का इस्तेमाल केंद्रीय बजट तैयार करने में किया जाता है, जिसे 1 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है. यह संकेत करता है कि भारत की आर्थिक नीति और निवेश गतिविधियां वास्तविक विकास के साथ-साथ मुद्रा मूल्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डाल रही हैं.

निवेश गतिविधियों से आर्थिक मजबूती
वित्त वर्ष 2026 में सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 7.1 प्रतिशत से अधिक है. यह आंकड़ा व्यवसायों द्वारा बुनियादी ढांचे, मशीनरी और दीर्घकालिक परियोजनाओं पर किए गए खर्च को दर्शाता है. निवेश में यह बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था की स्थिरता और दीर्घकालिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

सरकारी नीति बदलाव और उपभोक्ता मांग
सरकार द्वारा किए गए नीति बदलावों ने आर्थिक विकास को गति देने में अहम भूमिका निभाई है. आयकर में राहत और जीएसटी दरों में युक्तिसंगत सुधार से घरेलू उपभोक्ता मांग बढ़ी, जिससे वैश्विक व्यापार तनाव और टैरिफ संबंधी चुनौतियों के बावजूद विकास को स्थिरता मिली. मजबूत घरेलू मांग ने न केवल निर्यात पर असर को कम किया, बल्कि अर्थव्यवस्था को विकास की सही दिशा में बनाए रखा.

कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2026 में भारत की अर्थव्यवस्था न केवल तेज़ी से बढ़ रही है, बल्कि यह निवेश, नीति सुधार और घरेलू मांग के संतुलित मिश्रण के कारण स्थिर और मजबूत बनी हुई है. मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सेक्टर और निवेश गतिविधियों के बेहतर प्रदर्शन ने वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद विकास की दिशा तय की है.

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