RBI की मौद्रिक नीति बैठक में बदलाव की संभावना, कर्ज लेने वालों के लिए खुशखबरी

भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर वित्तीय जगत में कयासों का दौर शुरू हो गया है. विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई के कम दबाव के कारण RBI इस बार रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

भारतीय रिजर्व बैंक की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर वित्तीय जगत में कयासों का दौर शुरू हो गया है. विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई के कम दबाव के कारण RBI इस बार रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है. अगर केंद्रीय बैंक ऐसा करता है, तो इसका सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं को मिलेगा. 

कर्ज लेने की लागत घटेगी

लोन की ईएमआई कम होगी और कर्ज लेने की लागत भी घट जाएगी, जिससे घर, वाहन और व्यक्तिगत कर्ज सस्ते हो जाएंगे. रिजर्व बैंक के लिए यह स्थिति इसलिए अनुकूल मानी जा रही है क्योंकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खुदरा महंगाई पिछले दो महीनों से सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्य की निचली सीमा यानी 2 प्रतिशत से भी कम रही है. इससे संकेत मिलता है कि महंगाई नियंत्रण में है और आर्थिक गतिविधियों पर कट्टर दबाव नहीं है।.

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आर्थिक गतिविधियों में आई तेजी के चलते RBI ब्याज दरें नहीं घटा सकता. उनकी राय है कि आर्थिक मजबूती सरकारी खर्च में कटौती, सही जगहों पर निवेश और GST दरों में कमी जैसी सुधारों की वजह से आई है. मौद्रिक नीति समिति की बैठक 3 से 5 दिसंबर 2025 तक आयोजित होगी और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा 5 दिसंबर को इस फैसले की घोषणा करेंगे.

पिछले साल फरवरी में RBI ने रेपो दर में कटौती शुरू की थी और कुल मिलाकर इसे 5.5 प्रतिशत पर स्थिर किया. अगस्त में दरों में कटौती रोक दी गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार महंगाई में गिरावट और आर्थिक वृद्धि के संतुलन के कारण 0.25 प्रतिशत की कटौती संभव है.

HDFC बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल अर्थव्यवस्था की वृद्धि अपेक्षाओं से अधिक रही, जबकि महंगाई अनुमान से कम रही. रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही तक महंगाई 4 प्रतिशत से काफी नीचे रहने की संभावना है. यही वजह है कि RBI के लिए इस बैठक में दरों की दिशा तय करना महत्वपूर्ण हो गया है.

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदान ने क्या कहा?

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदान सबनवीस का कहना है कि मौद्रिक नीति भविष्य को देखते हुए बनाई जाती है और वर्तमान में ब्याज दरें उचित स्तर पर हैं. इसलिए उनका मानना है कि इस बैठक में दरों में बदलाव जरूरी नहीं. वहीं क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी का कहना है कि अक्टूबर में खुदरा महंगाई में आई गिरावट ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती के लिए अवसर बढ़ा दिया है, जबकि आर्थिक वृद्धि अभी भी मजबूत बनी हुई है.

इस प्रकार, RBI की आगामी बैठक में बाजार की निगाहें रेपो दर में संभावित बदलाव पर टिक गई है. इसका असर बैंकिंग और उपभोक्ता वित्तीय निर्णयों पर सीधा पड़ेगा.

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