स्टार्टअप्स पर SBI की नजर, स्टार्टअप-फोकस्ड फंड्स में भारी पूंजी लगा रहा बैंक, MSME सेक्टर को मिलेगा नया रफ्तार

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अब स्टार्टअप्स के सपनों को पंख लगा रहा है. बैंक स्टार्टअप फंड और फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर में जमकर निवेश कर रहा है. MSME को मजबूत करने की अपनी रणनीति के तहत SBI स्टार्टअप इंडिया स्कीम में सक्रिय है और कई शहरों में खास स्टार्टअप हब बना रहा है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने MSME सेक्टर को मजबूत बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है. बैंक अब स्टार्टअप-केंद्रित फंड्स और फाइनेंशियल मार्केट इंफ्रास्ट्रक्चर में डायरेक्ट इक्विटी पार्टिसिपेशन के जरिए सक्रिय रूप से निवेश कर रहा है. यह कदम MSME की क्रेडिट पहुंच बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहन देने और समग्र आर्थिक विकास को गति प्रदान करने वाली रणनीति का मुख्य हिस्सा है. 

मुंबई में UGRO कैपिटल द्वारा आयोजित ‘इंडिया बाय MSME’ इवेंट में SBI के मैनेजिंग डायरेक्टर ने इस रणनीति की विस्तार से जानकारी दी. उन्होंने बताया कि स्टार्टअप्स आज नए भारत की उद्यमिता की भावना को मजबूत करने का मजबूत माध्यम बन चुके हैं, जो MSME को क्रेडिट उपलब्ध कराने में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं. 

स्टार्टअप्स की महत्वपूर्ण भूमिका 

स्टार्टअप्स की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि नए भारत में फैल रही एंटरप्रेन्योरियल स्पिरिट के कोड के तौर पर, स्टार्टअप्स इनोवेशन को बढ़ावा देकर, इंटरनेट अपनाने को बढ़ावा देकर, और बेसिक रोजगार और आबादी का स्केल बनाकर MSME के लिए इकोनॉमिक एक्सपेंशन को आसान बनाकर MSMEs को क्रेडिट देने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. ये स्टार्टअप्स यूनिकॉर्न्स के जरिए तकनीकी गवर्नेंस को मजबूत कर रहे हैं, जिससे MSME क्षेत्र में आर्थिक विस्तार आसान हो रहा है. 

विभिन्न शहरों में स्टार्टअप हब की शुरुआत 

उन्होंने आगे कहा कि बैंक ने अलग-अलग शहरों में एक स्टार्टअप हब शुरू किया है और बेजोड़ स्किल और डिजिटल प्रोग्रेस ने स्टार्टअप्स को डेट, इक्विटी और सरकारी सर्विसेज के जरिए फंड मिलने में मदद की है. ये हब स्टार्टअप्स को आसानी से संसाधन उपलब्ध कराने में सहायक साबित हो रहे हैं, जिससे वे तेजी से बढ़ सकें. 

हब एंड स्पोक मॉडल के साथ समर्पित प्रयास 

उन्होंने कहा कि बैंक डेडिकेटेड वर्टिकल के जरिए आस-पास के एरिया की मदद करने के लिए हब और स्पोक मॉडल पर काम करता है, ताकि यह पक्का हो सके कि बैंक पार्टनरशिप की आदत के तहत स्टार्टअप्स को जोड़ने वाली प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग गाइडलाइंस के वादे को जान-बूझकर पूरा करे. यह मॉडल सुनिश्चित करता है कि हर क्षेत्र तक बैंक की सेवाएं प्रभावी ढंग से पहुंचें. 

फिनटेक कंपनियों और स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी

SBI के मैनेजिंग डायरेक्टर ने कहा कि स्टार्टअप्स और फिनटेक कंपनियों के साथ टाई-अप पक्का करना SBI के लिए एक प्रायोरिटी एरिया बना हुआ है, क्योंकि ये तीन तरीके हैं- फुर्ती और लचीलापन, साथ ही सप्लाई लेवल को असरदार तरीके से इस्तेमाल करने में मदद करना. ये साझेदारियां बैंक को अधिक तेज और लचीला बनाती हैं, जिससे MSME को बेहतर सेवाएं मिल सकें. 

रेगुलेटरी मानकों पर कोई समझौता नहीं

साथ ही, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में गवर्नेंस और रेगुलेटरी पैरामीटर्स में प्रूडेंशियल स्टैंडर्ड्स गाइडलाइंस का पालन जीरो कॉम्प्रोमाइज बना हुआ है. बैंक हर कदम पर पारदर्शिता और नियामक नियमों का सख्ती से पालन करता है, ताकि निवेश सुरक्षित और विश्वसनीय रहे.एसबीआई की यह रणनीति न केवल स्टार्टअप्स को मजबूत कर रही है, बल्कि MSME क्षेत्र को नई ऊर्जा दे रही है. इससे देश की अर्थव्यवस्था में छोटे-मध्यम उद्यमों की भागीदारी और बढ़ेगी, रोजगार सृजन होगा और समावेशी विकास की राह मजबूत होगी. 

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