पॉलिटिकल ट्विस्ट और विवाद से हिट हुई ‘धुरंधर 2’! क्या है फिल्म की सफलता का राज?
‘धुरंधर 2’ अपनी राजनीतिक कहानी और विवादों के कारण चर्चा में है. फिल्म में सरकार, आतंकवाद और असली घटनाओं से प्रेरित किरदार दिखाए गए हैं, लेकिन इसकी सफलता का असली कारण मजबूत कहानी और दर्शकों की उत्सुकता है.

बॉलीवुड की चर्चित फिल्म ‘धुरंधर 2’ रिलीज के साथ ही सुर्खियों में आ गई है. जहां एक ओर दर्शक फिल्म को लेकर उत्साहित नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसकी कहानी और राजनीतिक संदर्भों को लेकर बहस भी तेज हो गई है. दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के पहले पार्ट के समय ही अंदाजा लग गया था कि इसका अगला हिस्सा विवादों से घिर सकता है.
‘धुरंधर 2’ में राजनीति का असर पहले भाग के मुकाबले कहीं ज्यादा खुलकर दिखाया गया है. फिल्म में देश की बदलती सत्ता के साथ कहानी का रुख भी बदलता नजर आता है. एक भारतीय जासूस को पाकिस्तान में मिशन के दौरान ज्यादा खुलकर काम करने की छूट मिलती है, जो नई सरकार के आने के बाद संभव होता है. फिल्म में प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण और नोटबंदी जैसे बड़े फैसलों को भी कहानी का हिस्सा बनाया गया है.
किरदारों को लेकर विवाद
फिल्म का सबसे ज्यादा विवाद एक ऐसे किरदार को लेकर है, जो उत्तर प्रदेश के एक चर्चित नेता से प्रेरित बताया जा रहा है. हालांकि फिल्म में नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया है, लेकिन दर्शकों को यह समझने में देर नहीं लग रही कि इशारा किसकी ओर है. खासतौर पर उस किरदार की हत्या को जिस तरह कहानी में जोड़ा गया है, उसने बहस को और तेज कर दिया है.
कहानी में राजनीति का तड़का
फिल्म में आतंकवाद, ड्रग्स और अवैध हथियारों के नेटवर्क को दिखाया गया है, जिनके तार देश के भीतर और बाहर तक जुड़े हुए हैं. कहानी में एक मोड़ पर इन सबका संबंध एक कुख्यात गैंगस्टर से भी जोड़ा जाता है. फिल्म यह दिखाने की कोशिश करती है कि इन समस्याओं से निपटने में सरकार के कुछ फैसलों की अहम भूमिका रही है. यही वजह है कि कुछ लोग इसे ‘प्रोपेगेंडा’ कह रहे हैं, जबकि कुछ इसे सिर्फ एक कहानी का हिस्सा मानते हैं.
क्या विवाद से मिलती है सफलता?
अक्सर यह माना जाता है कि विवाद किसी भी फिल्म की कमाई बढ़ाने में मदद करते हैं, लेकिन यह पूरी तरह सच नहीं है. पहले भी कई ऐसी फिल्में आई हैं, जिनमें राजनीतिक मुद्दों को दिखाया गया, लेकिन वे बॉक्स ऑफिस पर खास कमाल नहीं कर सकीं. इससे यह साफ होता है कि सिर्फ विवाद पैदा करने से फिल्म हिट नहीं होती.
दर्शकों की पसंद बनी असली ताकत
‘धुरंधर 2’ की सफलता का सबसे बड़ा कारण इसकी कहानी और पहले भाग से जुड़ी उत्सुकता है. दर्शक जानना चाहते थे कि आगे क्या होगा, और यही जिज्ञासा उन्हें सिनेमाघरों तक खींच लाई. फिल्म में राजनीति जरूर है, लेकिन यह पूरी कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है.
फिल्म का पहला हिस्सा मुख्य किरदार की यात्रा पर केंद्रित है, जबकि दूसरे हिस्से में राजनीतिक घटनाएं ज्यादा सामने आती हैं. हालांकि, पूरी फिल्म में कहानी का मुख्य फोकस किरदार की जर्नी पर ही रहता है. राजनीति को सहायक तत्व की तरह इस्तेमाल किया गया है, न कि पूरी कहानी उसी पर आधारित है.


