होर्मुज से जुड़े बड़े खुलासे ने मचाई सनसनी, ईरान ने खुद कराया भारतीय जहाजों को पार!

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर कड़ा नियंत्रण कर दिया है, लेकिन भारत के एलपीजी टैंकरों को कूटनीतिक प्रयासों के बाद सुरक्षित गुजरने की अनुमति मिली. इस दौरान ईरान चुनिंदा जहाजों को ही रास्ता दे रहा है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ रहा है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

अमेरिका के साथ जारी तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल और गैस के जहाजों पर सख्त नियंत्रण लागू कर रखा है. बीते कुछ दिनों में उसने कई विदेशी जहाजों की आवाजाही रोक दी, यहां तक कि कुछ जहाजों को निशाना बनाकर डुबोने की घटनाएं भी सामने आईं. अब भारत के लिए राहत की खबर तब आई, जब पिछले सप्ताह दो एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार करने की अनुमति मिली. अब इस पूरे मामले में एक बड़ा खुलासा हुआ है. 

क्या भारतीय जहाजों को मिली ईरान की सहायता? 

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जिन जहाजों ने हाल ही में यह मार्ग पार किया, उन्हें ईरानी नौसेना की सीधी सहायता मिली थी. नई दिल्ली के स्तर पर हुई बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के बाद इन टैंकरों को पहले से निर्धारित सुरक्षित मार्ग से गुजरने की इजाजत दी गई. यात्रा के दौरान जहाज लगातार ईरानी अधिकारियों के संपर्क में रहे और उनकी निगरानी में आगे बढ़े.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इन जहाजों से कई तरह की जानकारियां हासिल कीं, जैसे उनका झंडा, नाम, प्रस्थान और गंतव्य बंदरगाह और चालक दल की राष्ट्रीयता. सभी सूचनाओं की पुष्टि के बाद ही उन्हें आगे बढ़ने का निर्देश दिया गया. इससे यह संकेत मिलता है कि ईरान इस अहम समुद्री मार्ग पर एक तरह का नियंत्रण तंत्र स्थापित कर रहा है, जिसके तहत वह अपने अनुकूल देशों को राहत देता है, जबकि अन्य के लिए जोखिम बना रहता है.

विशेषज्ञों का क्या मानना है? 

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान केवल चुनिंदा जहाजों को ही इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दे रहा है. इसके पीछे उसकी रणनीति वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर दबाव बनाना और अपनी स्थिति मजबूत करना है. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है.

युद्ध शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में कई जहाजों पर ड्रोन और मिसाइल हमले हो चुके हैं, जिससे समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है. इन घटनाओं के चलते जहाजों का बीमा महंगा हो गया है और तेल, गैस व अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भी उछाल देखने को मिल रहा है. इसके अलावा, इस जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाए जाने की आशंका ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है.

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