जो मन करेगा वो करोगे...सांप केस में यूट्यूबर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार, कहा- समाज को गलत संदेश दिया

यूट्यूबर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट ने सांप और जहर केस में शुक्रवार को सुनवाई के दौरान कड़ी फटकार लगाई है. अदालत ने कहा कि मशहूर हस्तियों द्वारा बेजुबान जानवरों का गलत इस्तेमाल से समाज को गलत मैसेज दिया है. साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि अब वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत जांच की जाएगी. 

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : मशहूर यूट्यूबर और बिग बॉस विजेता एल्विश यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. सांपों के जहर वाले चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एल्विश को कड़ी फटकार लगाते हुए उनके आचरण पर सवाल उठाए हैं. जस्टिस एमएम सुंदरेश और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने स्पष्ट किया कि एक प्रभावशाली व्यक्ति होने के नाते उनकी जिम्मेदारी अधिक है. कोर्ट ने मामले की जांच वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत जारी रखने के सख्त निर्देश जारी किए हैं.

आम जनता के बीच गलत संदेश गया

आपको बता दें कि सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त लहजा अपनाया. कोर्ट ने कहा कि अगर किसी लोकप्रिय व्यक्ति को बिना आवाज वाले और बेबस जानवरों का इस तरह इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई, तो इससे आम जनता के बीच गलत संदेश जाएगा. बेंच ने जोर देकर कहा कि सांप एक संरक्षित प्रजाति हैं और कानूनन हम उन्हें किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा सकते. कोर्ट ने एल्विश की उस याचिका पर सवाल उठाए जिसमें उन्होंने आपराधिक कार्रवाई को चुनौती दी थी.

बचाव पक्ष की सफाई

वहीं, एल्विश यादव के वकील मुक्ता गुप्ता ने कोर्ट में दलील दी कि वे सांप उनके मुवक्किल के नहीं थे. उन्होंने बताया कि एल्विश केवल एक म्यूजिक वीडियो में गेस्ट अपीयरेंस के तौर पर शामिल हुए थे. सांपों को लाने और उन्हें संभालने की जिम्मेदारी किसी और की थी. वकील ने यह भी दावा किया कि वीडियो शूट के लिए प्रोड्यूसर ने जरूरी अनुमतियां ली थीं और उन सांपों के दांत या जहर की थैली पहले से ही मौजूद नहीं थी.

कोर्ट ने वाइल्डलाइफ एक्ट पर दिया जोर

सुप्रीम कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों के बावजूद नई जांच रिपोर्ट तलब की है. बेंच ने कहा कि उन्हें यह देखना होगा कि क्या वास्तव में सांपों के इस्तेमाल के लिए आधिकारिक अनुमति ली गई थी. जस्टिस सुंदरेश ने स्पष्ट किया कि भले ही मुख्य एफआईआर बंद हो जाए, लेकिन वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन की जांच जारी रहेगी. कोर्ट ने अभियोजन पक्ष से दो हफ्ते के भीतर विस्तृत रिपोर्ट फाइल करने को कहा है ताकि कानून के उल्लंघन की सच्चाई सामने आ सके.

अजगर पर कानूनी बहस

सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता ने दावा किया कि बरामद किए गए अजगर में जहर की थैली मौजूद थी. इस पर जस्टिस कोटिश्वर सिंह ने टोका और पूछा कि अजगर जहरीला कैसे हो सकता है? उन्होंने समझाया कि अजगर अपने शिकार को जहर से नहीं बल्कि शरीर से दबाकर मारते हैं. कोर्ट ने कहा कि वह केवल तकनीकी रिपोर्टों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगा और भविष्य में कानून के उल्लंघन की गंभीरता को बारीकी से परखेगा.

क्या है पूरा विवाद?

यह पूरा विवाद नवंबर 2023 का है, जब नोएडा पुलिस ने एक रेव पार्टी पर छापेमारी की थी. पुलिस को सूचना मिली थी कि वहां सांपों के जहर का नशा परोसा जा रहा है. छापेमारी में कोबरा समेत कुल 9 जहरीले सांप बरामद हुए थे. यह कार्रवाई बीजेपी सांसद मेनका गांधी के एनजीओ की शिकायत पर हुई थी. इस संवेदनशील मामले में एल्विश यादव को गिरफ्तार भी किया गया था और उन्हें कुछ दिन जेल की सलाखों के पीछे बिताने पड़े थे.

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