फ्री योजनाओं को बंद करवाना चाहती है केंद्र सरकार : केजरीवाल

केजरीवाल सरकार की फ्री योजनाओं को लेकर जो बहस छिड़ी है वो रुकने का नाम नहीं ले रही है। बीजेपी लगातार अरविंद केजरीवाल की योजनाओं को फ्री की रेवड़ियां बता कर उसकी आलोचना कर रही है।

Janbhawana Times

नई दिल्ली : केजरीवाल सरकार की फ्री योजनाओं को लेकर जो बहस छिड़ी है वो रुकने का नाम नहीं ले रही है। बीजेपी लगातार अरविंद केजरीवाल की योजनाओं को फ्री की रेवड़ियां बता कर उसकी आलोचना कर रही है। इसी कड़ी में गुरुवार को सीएम अरविंद केजरीवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधा।

सीएम अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि केन्द्र फ्री योजनाओं को बंद करने की कोशिश कर रहा है। केजरीवाल ने कहा कि केन्द्र के पास 8वां वेतन आयोग के पैसे नहीं हैं. उन्होंने कहा कि अग्निपथ योजना जब लेकर आए तो कहा गया कि इसको लाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि सैनिकों के पेंशन का खर्च इतना बढ़ गया कि केंद्र सरकार उसको बर्दाश्त नहीं कर पा रही।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जब सरकार अग्निपथ योजना लाई तो कहा कि सैनिकों की पेंशन का बोझ कम करने के लिए किया जा रहा है, आजादी से अब तक तो ऐसा नहीं हुआ कि सैनिकों को पेंशन देने का पैसा नहीं है। इस बार आठवां वेतन आयोग बनना था, केंद्र ने मना कर दिया, अपने कर्मचारियों को देने का भी पैसा नहीं है ? गरीब लोगों को मनरेगा के तहत मजदूरी देती थी उसमें भी 25% की कमी कर दी गई, कह रहे हैं कि पैसा नहीं है।

सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पहले राज्यों को 42% का हिस्सा मिलता था अब घटकर 39% कर दिया है। वहीं, आजादी के बाद से गेहूं, चावल पर टैक्स नहीं लगता था, लेकिन इन्होंने गरीब से गरीब के खाने पीने के चीजों पर टैक्स लगा दिया, जब पेट्रोलियम पर सालाना हजारों करोड़ों टैक्स केंद्र सरकार वसूलती है। ये सब करना क्यों जरूरी हो गया? कहां गया पैसा ? ऐसे में सरकारी स्कूलों में फीस ली जाएगी, सरकारी अस्पतालों में बिना पैसों के लिए इलाज नहीं होगा, कहां जाएगा गरीब आदमी, अब ये फ्री का राशन भी बंद करने के लिए कह रहे हैं।

केजरीवाल ने आगे कहा कि आज़ादी के बाद पहली बाद ऐसा हो रहा है कि कोई सरकार ऐसा कह रही है। वहीं, पिछले कुछ दिनों से जिस तरह से जनता को मुफ्त में मिलने वाली सुविधाओं का विरोध किया जा रहा है। ऐसे में कहा जा रहा है कि सारी मुफ्त की सुविधाओं को बंद किया जाए। क्या केंद्र सरकार की आर्थिक हालत ज्यादा खराब तो नहीं हो गई है।

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