10 हजार ड्रोन, भैरव बटालियन और रॉकेट फोर्स… चीन-पाक के खिलाफ भारत की नई सीमा रणनीति

ड्रोन से बढ़ते खतरे को देखते हुए भारतीय सेना ने सीमाओं से 35 किलोमीटर तक और 3 किलोमीटर ऊंचाई तक निगरानी बढ़ाई है. चीन और पाकिस्तान की चुनौती के बीच एयर कमांड सेंटर और आधुनिक ड्रोन तैनाती तेज की गई है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: भारत की सीमाओं पर बदलते सुरक्षा हालात को देखते हुए भारतीय सेना ने ड्रोन से होने वाली घुसपैठ और हमलों को रोकने के लिए एक अहम फैसला लिया है. अब देश की सीमाओं से 35 किलोमीटर के दायरे में और अधिकतम 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ने वाली हर गतिविधि पर सेना सीधे नजर रखेगी. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर दुश्मन देशों द्वारा ड्रोन के इस्तेमाल में तेजी देखी जा रही है.

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने अपनी तैनाती और युद्ध रणनीति में कई बड़े बदलाव किए हैं. इनमें नई रॉकेट रेजिमेंट की शुरुआत, ड्रोन आधारित निगरानी बढ़ाना और आधुनिक हथियार प्रणालियों को शामिल करना प्रमुख है. सेना का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन और तकनीक की भूमिका निर्णायक होगी, इसलिए समय रहते तैयारी जरूरी है.

सीमाओं पर एयर कमांड और कंट्रोल सेंटर

सूत्रों के अनुसार, सेना द्वारा संचालित लगभग 97 प्रतिशत ड्रोन और एंटी-ड्रोन गतिविधियां 35 किलोमीटर के जमीन क्षेत्र और 3 किलोमीटर के हवाई क्षेत्र के भीतर होती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर विशेष एयर कमांड और कंट्रोल सेंटर बनाए जा रहे हैं. इन केंद्रों का काम न सिर्फ सीमा पार ड्रोन गतिविधियों की निगरानी करना होगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुश्मन के ड्रोन को निष्क्रिय करना भी होगा.

भारतीय सेना पश्चिमी मोर्चे पर करीब 10,000 ड्रोन और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर 20,000 से अधिक ड्रोन तैनात करने की क्षमता विकसित कर रही है. इन अभियानों में सेना के कोर कमांडर, वायुसेना के क्षेत्रीय कमांडर, खुफिया एजेंसियों और अन्य सुरक्षा संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल रखा जाएगा.

पाकिस्तान और चीन से बढ़ती चुनौती

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने तुर्की और चीन से मिले सशस्त्र ड्रोनों का इस्तेमाल कर भारतीय सेना और वायुसेना के ठिकानों को निशाना बनाया था. इसके अलावा, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) भी पूर्वी मोर्चे पर भारतीय गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का उपयोग करती है. इन्हीं खतरों को देखते हुए सीमा क्षेत्रों में निगरानी को और मजबूत किया जा रहा है.

रॉकेट फोर्स और भैरव बटालियन की तैनाती

सेना ने पहले ही रॉकेट फोर्स की दो यूनिट, दो संयुक्त सशस्त्र ब्रिगेड (रुद्र ब्रिगेड) और 21 भैरव बटालियन तैनात कर दी हैं. साथ ही भारतीय तोपखाने की मारक क्षमता को भी बढ़ाकर सीमाओं के पार 1,000 किलोमीटर तक कर दिया गया है. भैरव बटालियनों का उद्देश्य सीमाओं पर तेजी से कार्रवाई करना और सामरिक अभियानों को अंजाम देना है.

एलएसी पर हालात और भविष्य की तैयारी

मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीनी घुसपैठ के बाद हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे. हालांकि अक्टूबर 2024 में डेमचोक और डेपसांग जैसे अंतिम टकराव बिंदुओं से सैनिकों की वापसी के बाद गतिरोध खत्म हो गया. इसके बावजूद सेना किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है.

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