13 साल, 5 बार उप मुख्यमंत्री... अजित पवार कैसे बने महाराष्ट्र के पावर सेंटर, जानें राजनीतिक सफर
महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता अजित पवार का बुधवार विमान हादसे में निधन हो गया. महाराष्ट्र की राजनीति में उन्हें सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं. पांच बार उप मुख्यमंत्री रह चुके पवार का सफर सत्ता और विवाद का अनोखा मिश्रण रहा.

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेता अजित पवार का बुधवार विमान हादसे में निधन हो गया. महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय से अपनी पकड़ बनाए रखने वाले अजित पवार ने पिछले 13 वर्षों में पांच बार उप मुख्यमंत्री का पद संभाला. वह महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक गैर-लगातार उप मुख्यमंत्री रहने वाले नेताओं की सूची में शामिल हुए.
उप मुख्यमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल
अजित पवार का उप मुख्यमंत्री पद पर रहना हमेशा चर्चा में रहा है.
10 नवंबर 2010-25 सितंबर 2012: मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण
25 अक्टूबर 2012-26 सितंबर 2014: मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण
30 दिसंबर 2019-29 जून 2022: मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे
2 जुलाई 2023-वर्तमान: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस सरकार
वर्तमान में वह देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में एकनाथ शिंदे के साथ महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री के रूप में कार्यरत रहे.
कौन हैं अजित पवार?
अजित अनंतराव पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले में हुआ. वे एनसीपी प्रमुख शरद पवार के भतीजे हैं और उनके पिता अनंतराव पवार थे. राजनीति में कदम रखने से पहले अजित पवार का परिवार फिल्म और मनोरंजन क्षेत्र से जुड़ा हुआ था. अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के नक्शेकदम पर चलते हुए राजनीति में प्रवेश किया. उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा देओली प्रवर से पूरी की और माध्यमिक स्तर की पढ़ाई महाराष्ट्र शिक्षा बोर्ड से संपन्न की.
कैसे रहा राजनीतिक सफर?
अजित पवार ने केवल 20 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखा. उनकी राजनीतिक यात्रा की कुछ प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
1982 में एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा.
1991 में पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और 16 साल तक इस पद पर रहे.
1991 में बारामती से लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी और उसी वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा के सदस्य बने.
1992-93 में कृषि और बिजली राज्य मंत्री के रूप में सेवा की.
1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से लगातार जीत हासिल की.
अजित पवार ने कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाली. खासकर जल संसाधन मंत्री के रूप में कृष्णा घाटी और कोकण सिंचाई परियोजनाओं का नेतृत्व किया.
सत्ता में उनकी भूमिका
अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में कुशल और प्रभावशाली नेता माना जाता है. 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने उप मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई थी. हालांकि, तब यह पद छगन भुजबल को मिला. दिसंबर 2010 में उन्हें पहली बार यह पद सौंपा गया. 2013 में सिंचाई घोटाले से जुड़े विवाद में उनका नाम आया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दिया. बाद में उन्हें क्लीन चिट मिल गई और वह पुनः पद पर लौट आए.
विवाद और आलोचना
अजित पवार का राजनीतिक जीवन विवादों से भी अछूता नहीं रहा:
2013 में “अगर बांध में पानी नहीं है तो क्या पेशाब करके भरें?” वाला विवादित बयान.
2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान मतदाताओं को धमकाने के आरोप.
लवासा लेक सिटी प्रोजेक्ट और भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य मामले.
इन सबके बावजूद, अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एनसीपी के सबसे मजबूत और भरोसेमंद नेताओं में माने जाते रहे.
राजनीतिक पहचान
अजित पवार को एक संगठित और प्रशासनिक अनुभव वाले नेता के रूप में देखा जाता है. उनके और शरद पवार के बीच कभी-कभी राजनीतिक मतभेदों की चर्चाएं होती रही हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को शरद पवार का अनुयायी बताया. आज महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति में उनकी भूमिका निर्णायक और महत्वपूर्ण मानी जाती है.


