4 साल की देरी ने बढ़ाई देश की पहली बुलेट ट्रेन की लागत, 2 लाख करोड़ के करीब पहुंचा खर्च
देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना एक बार फिर सुर्खियों में है. अहमदाबाद–मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर में चार साल से ज्यादा की देरी के चलते इसकी लागत करीब 2 लाख करोड़ रुपये के पास पहुंच गई है, जिससे समय और खर्च दोनों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं.

नई दिल्ली: देश की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर समय से पीछे चल रही है. चार साल से अधिक की देरी के चलते इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की लागत में भारी इजाफा हुआ है और अब इसका अनुमानित खर्च करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यह आंकड़ा शुरुआती स्वीकृत लागत से लगभग 83 प्रतिशत अधिक है.
शुरुआत में इस परियोजना को लगभग 1.1 लाख करोड़ रुपये की लागत पर मंजूरी दी गई थी. बढ़ी हुई लागत और देरी को लेकर सरकार की ‘प्रगति’ पहल के तहत आयोजित एक ब्रीफिंग में इस संबंध में अहम जानकारियां सामने आईं.
संशोधित लागत को अंतिम मंजूरी अभी बाकी
ब्रीफिंग के दौरान रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं सीईओ सतीश कुमार ने बताया कि परियोजना की संशोधित लागत को लेकर अंतिम स्वीकृति अभी नहीं मिली है, लेकिन मौजूदा अनुमान इसे करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये के आसपास रखता है.
उन्होंने कहा कि लागत के पुनरीक्षण की प्रक्रिया जारी है और इसे एक-दो महीनों में अंतिम रूप दे दिया जाएगा.
देरी और लागत बढ़ने की प्रमुख वजहें
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, परियोजना में देरी और लागत बढ़ने के पीछे कई अहम कारण रहे हैं. इनमें
- भूमि अधिग्रहण में देरी,
- कानूनी और वैधानिक मंजूरियों में समय लगना,
- और बुलेट ट्रेनों के रोलिंग स्टॉक के अंतिम चयन में हुई देर शामिल हैं.
रेलवे के मुताबिक, 30 नवंबर तक परियोजना की भौतिक प्रगति 55.6 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 69.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी. इस अवधि तक कुल 85,801 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं.
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में रेलवे मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा के दौरान इस परियोजना को तेज़ी से पूरा करने के निर्देश भी दिए थे.
निर्माण में बड़ी उपलब्धि, सुरंग का ब्रेकथ्रू
इस बीच परियोजना को लेकर एक बड़ी निर्माण उपलब्धि भी हासिल हुई है. शुक्रवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन से वर्चुअल माध्यम से महाराष्ट्र के पालघर जिले में 1.5 किलोमीटर लंबी पर्वतीय सुरंग के अंतिम ब्रेकथ्रू का साक्षी बने.
उन्होंने इसे एक अहम मील का पत्थर बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि माउंटेन टनल-5 के ब्रेकथ्रू के रूप में दर्ज हुई है.
रेल मंत्रालय के अनुसार, यह सुरंग पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में से एक है और विरार व बोईसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच स्थित है. मंत्रालय ने बताया कि यह महाराष्ट्र में दूसरी सुरंग का ब्रेकथ्रू है. इससे पहले ठाणे और बीकेसी (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) के बीच 5 किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग सितंबर 2025 में पूरी हो चुकी है.
320 किमी/घंटा की रफ्तार और पर्यावरण को लाभ
अहमदाबाद–मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरती है. इसे 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से संचालन के लिए डिजाइन किया गया है.कॉरिडोर को इस तरह विकसित किया जा रहा है कि भविष्य में जापानी E10 सीरीज शिंकानसेन ट्रेनों का संचालन भी संभव हो, जो मौजूदा डिजाइन स्पीड से 20 किमी/घंटा अधिक रफ्तार से चल सकेंगी.
परियोजना पूरी होने पर सड़क परिवहन की तुलना में करीब 95 प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है, जिससे यह परियोजना पर्यावरण के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है.पहला चरण सूरत से बिलीमोरा के बीच अगस्त 2027 में शुरू किए जाने की योजना है, जबकि पूरे 508 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के दिसंबर 2029 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है.


