जज-वकील टकराव पर गरमाया माहौल, सोमवार को न्यायिक कार्य से दूर रहेंगे वकील

पटना हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने हाई कोर्ट के जजों पर अपमानजनक और गरिमाहीन व्यवहार का आरोप लगाते हुए 11 मई को न्यायिक कार्यों के बहिष्कार की घोषणा की है.

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Edited By: JBT Desk

नई दिल्ली: पटना हाई कोर्ट में जजों और वकीलों के बीच तनाव बढ़ गया है. हाई कोर्ट के जजों पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाते हुए बार एसोसिएशन ने न्यायिक कार्यों के बहिष्कार की घोषणा की है. तीन प्रमुख वकील संघों वाली समन्वय समिति ने सोमवार, 11 मई को न्यायिक कार्यवाही के बहिष्कार की घोषणा की है.

समिति ने आरोप लगाया है कि हाल के दिनों में कोर्ट के भीतर जजों का आचरण लगातार अपमानजनक और गरिमाहीन होता जा रहा है, जिससे वकीलों की गरिमा को ठेस पहुंच रही है. बार एसोसिएशन ने आगे आरोप लगाया है कि हाई कोर्ट की कार्यवाही के दौरान जज खुद को कानून और अन्य सभी विषयों का जानकार  मानते हैं.

बैठक में तीनों संघों के वकील मौजूद

वकीलों ने एक दिन पहले जारी किए गए इस आदेश का विरोध किया है. शुक्रवार को हुई एक बैठक के बाद समन्वय समिति ने एक नोटिस जारी किया जिसमें कहा गया कि वकीलों और जजों के बीच की दूरी बढ़ती जा रही है. इसमें कहा गया कि कोर्ट की कार्यवाही के दौरान जजों का वकीलों के प्रति रवैया अपमानजनक और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला रहा है. इस बैठक में तीनों एसोसिएशन के वकील मौजूद थे.

बैटरी से चलने वाली गाड़ियों का उपयोग

7 मई को हाई कोर्ट प्रशासन द्वारा जारी एक नोटिस में वकीलों, डॉक्टरों, कर्मचारियों और अन्य लाभार्थियों को पहले दी गई वह सुविधा तत्काल प्रभाव से वापस ले ली गई, जिसके तहत उन्हें निर्धारित बैरियर से आगे निकलकर कोर्ट परिसर के अंदर तक अपने वाहन ले जाने की अनुमति थी. हाई कोर्ट ने बैटरी-चालित वाहन सेवा की व्यवस्था की है लेकिन बुजुर्ग और महिला वकील इसकी ऊंची बनावट के कारण इसमें चढ़ने में असमर्थ हैं. 

लिफ्ट तक कैसे पहुंचेंगे वकील?

ऐसे कई वकील हैं जो शारीरिक रूप से चलने-फिरने में असमर्थ हैं या ज्यादा उम्र होने के कारण पैदल लंबी दूरी तय नहीं कर सकते. प्रशासन इस बारे में कोई व्यावहारिक समाधान देने में नाकाम रहा है कि ऐसे वकील गेट के पास अपनी गाड़ियों से उतरने के बाद कोर्ट की इमारत तक कैसे पहुंचेंगे. वकीलों के अनुसार बैटरी से चलने वाली गाड़ियां जमीन से काफी ऊंची होती हैं, जिससे बुज़ुर्ग और महिला वकीलों के लिए उनमें चढ़ना मुश्किल हो जाता है. वकीलों का कहना है कि अगर प्रशासन सचमुच मौजूदा इंतजामों को बेहतर बनाना चाहता है तो उसे वकीलों की सहूलियतों और मुश्किलों को ध्यान में रखकर ही फैसले लेने चाहिए.

 काम का बहिष्कार करने का फैसला

इस नोटिस के विरोध में बुलाई गई एक आपातकालीन मीटिंग के दौरान 11 मई को काम का बहिष्कार करने का सर्वसम्मति से फैसला लिया गया. जारी किए गए प्रस्ताव पर इन पदाधिकारियों के हस्ताक्षर हैं, संजय कुमार सिंह (अध्यक्ष, पटना हाई कोर्ट बार एसोसिएशन), मुकेश कांत (सचिव), योगेश चंद्र वर्मा (अध्यक्ष, एडवोकेट्स एसोसिएशन और चेयरमैन, समन्वय समिति), जय शंकर प्रसाद सिंह (महासचिव), एस.एन. सिंह (उपाध्यक्ष, लॉयर्स एसोसिएशन), और राजीव कुमार सिंह (महासचिव).

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