Gautam Navlakha: गौतम नवलखा को बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत, एल्गर परिषद मामले में मिली जमानत

Gautam Navlakha: साल 2018 में एल्गर परिषद मामले को लेकर गिरफ्तार एक्टिविस्ट गौतम नवलखा को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है. वह अपने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से घर में नजरबंद रह रहे हैं. 

Manoj Aarya
Edited By: Manoj Aarya

Gautam Navlakha in Elgar Parishad Case: साल 2018 में एल्गर परिषद मामले को लेकर गिरफ्तार एक्टिविस्ट गौतम नवलखा को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है. वह अपने स्वास्थ्य संबंधी कारणों से घर में नजरबंद रह रहे हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने अदालत से आदेश को छह सप्ताह के लिए निलंबित करने का आग्रह किया ताकि वह सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर सके. इसके बाद कोर्ट ने जांच एजेंसी को तीन हफ्ते का समय दिया.

बता दें कि गौतम नवलखा को अगस्त 2018 में गिरफ्तार किया गया था. पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नवी मुंबई में नजरबंद करने की अनुमति दी थी. न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, हाई कोर्ट ने नवलखा को ₹1 लाख के मुचलके पर जमानत दी है.

एल्गर परिशद मामले के सातवें आरोपी हैं गौतम नवलखा

गौतम नवलखा एल्गार परिषद मामले में जमानत पाने वाले सातवें आरोपी हैं. एक विशेष अदालत ने अप्रैल में नवलखा को यह कहते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया था कि प्रथम दृष्टया उनके संबंध प्रतिबंधित सीपीआई (माओवादी) से हैं. उच्च न्यायालय में दायर अपनी अपील में नवलखा ने कहा कि विशेष अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार करके गलती की है. नियमित जमानत के लिए उच्च न्यायालय में नवलखा की अपील का यह दूसरा दौर है. पिछले साल सितंबर में विशेष एनआईए अदालत द्वारा उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज करने के बाद नवलखा ने पहले उच्च न्यायालय का रुख किया था.

गौतम नवलखा के खिलाफ जांच एजेंसी का गंभीर आरोप 

एनआईए ने तब नवलखा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दावा किया था कि उनकी भर्ती के लिए उन्हें पाकिस्तान इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) जनरल से मिलवाया गया था, जो संगठन के साथ उनकी सांठगांठ को दर्शाता है. हालांकि, उच्च न्यायालय ने राय दी थी कि विशेष अदालत के आदेश में तर्क गूढ़ था और इसमें अभियोजन पक्ष के दृष्टिकोण के आधार पर सबूतों का विश्लेषण शामिल नहीं था. उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया था कि जमानत आवेदन पर विशेष अदालत द्वारा नए सिरे से सुनवाई की आवश्यकता है, और मामले को वापस अदालत में भेज दिया था. इसने विशेष न्यायाधीश को चार सप्ताह के भीतर सुनवाई समाप्त करने का भी निर्देश दिया था.

क्या है यह पूरा मामला? 

यह मामला 31 दिसंबर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद सम्मेलन में दिए गए कथित भड़काऊ भाषणों से संबंधित है, जिसके बारे में पुलिस का दावा है कि अगले दिन पश्चिमी महाराष्ट्र शहर के बाहरी इलाके में कोरेगांव-भीमा युद्ध स्मारक के पास हिंसा भड़क उठी.

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