मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कॉलेजियम प्रणाली सुधार पर दिया बड़ा बयान, कहा "पारदर्शिता जरूरी"

भारत के चीफ जस्टिस (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने देश में जजों की नियुक्ति के कॉलेजियम सिस्टम में सुधार की ज़रूरत पर ज़ोर दिया है, और कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही से यह सिस्टम और मज़बूत होगा।

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने देश की न्यायिक नियुक्तियों की कॉलेजियम प्रणाली में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि पारदर्शिता और जवाबदेही इस प्रणाली को और मजबूत बनाएंगे.उन्होंने यह बात एक इंटरव्यू मे न्यायपालिका की भूमिका पर विचार व्यक्त करते हुए कही.उनके विचारों से यह स्पष्ट होता है कि वे सिर्फ वर्तमान व्यवस्था के संरक्षण नहीं बल्कि उसके सुधार की दिशा में भी सोच रखते हैं.

न्यायपालिका की स्वतंत्रता और भूमिका

जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को संविधान की आधारशिला बताया और कहा कि यह हमारे देश में प्रभावी न्याय वितरण का मूल स्तंभ है.उन्होंने कहा कि न्यायपालिका का काम केवल कानून लागू करना नहीं बल्कि संविधान द्वारा दिए अधिकारों की रक्षा करना भी है.इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि कार्यवाही के संक्षिप्त हिस्सों को सोशल मीडिया पर संदर्भ के बिना साझा करना गलतफहमियों को जन्म देता है और इससे न्याय की गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा होता है.

कॉलेजियम प्रणाली में सुधार की आवश्यकता

कॉलेजियम सिस्टम के बारे में बोलते हुए, जस्टिस सूर्यकांत ने स्वीकार किया कि यह प्रणाली अपेक्षाकृत पारदर्शी हुई है लेकिन सुधार की गुंजाइश आज भी मौजूद है.उन्होंने कहा कि उम्मीदवारों के साथ व्यक्तिगत बातचीत, योग्यता, सत्यनिष्ठा और अनुभव जैसे मानदंडों पर और अधिक ध्यान देना चाहिए.उन्होंने यह भी बताया कि नियुक्तियों में अनुमोदन और अस्वीकृति के कारण बताने का प्रयास सिस्टम में अधिक खुलेपन की दिशा में एक सकारात्मक कदम है.

उन्होंने कहा कि कॉलेजियम प्रक्रिया जटिल है और सिस्टम की अखंडता बनाए रखने के लिए कुछ आंतरिक प्रक्रियाओं को सार्वजनिक डोमेन में पूरी तरह से रखना संभव नहीं हो सकता है, लेकिन यथासंभव अधिक पारदर्शिता लाने की कोशिश होनी चाहिए.

सामाजिक अपेक्षाओं और न्याय की समझ

सूर्यकांत ने यह भी कहा कि आलोचना अक्सर अज्ञानता से उत्पन्न होती है और ऐसे में सोशल मीडिया को नियंत्रित करने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि समुदाय को न्यायिक प्रक्रिया और उससे जुड़े निर्णयों की बेहतर समझ प्रदान करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए.

विशेषज्ञ यह मानते हैं कि कॉलेजियम प्रणाली पर चर्चा और न्यायिक नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर देना इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है.पिछले कुछ समय में न्यायपालिका में नामांकन और नियुक्तियों में पारदर्शिता को लेकर कई सुझाव और याचिकाएं भी सामने आई हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सिस्टम में जवाबदेही और खुलापन लाने की मांग बढ़ रही है.

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