जम गई दिल्ली, जकड़ रहे हाथ...3 डिग्री तक गिरा राजधानी का पारा, मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी

दिल्ली में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी ने लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है. न्यूनतम तापमान 3 डिग्री तक गिर गया है. पश्चिमी हवाएं, बर्फबारी, कोहरा और प्रदूषण ठंड बढ़ा रहे हैं, जिससे फिलहाल राहत की उम्मीद कम है.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः दिल्ली की सर्दी ने इस बार न सिर्फ आम लोगों को हैरान कर दिया है, बल्कि मौसम विशेषज्ञों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया है. सुबह होते ही ठिठुरन, गलियों में पसरा सन्नाटा और सड़कों पर तैरती धुंध ने राजधानी की रफ्तार धीमी कर दी है. हालात ऐसे हैं कि लोग धूप निकलने का इंतजार करते-करते आधा दिन गुजार देते हैं. यह सर्दी केवल मौसम नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव बन चुकी है, जिसने दिल्ली को पहाड़ी इलाकों से भी ज्यादा ठंडा महसूस करा दिया है.

तापमान ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड

मंगलवार सुबह आया नगर, पालम और सफदरजंग जैसे इलाकों में न्यूनतम तापमान 3 डिग्री सेल्सियस या उससे भी नीचे दर्ज किया गया. यह आंकड़ा बीते कई वर्षों के रिकॉर्ड के करीब माना जा रहा है. हैरानी की बात यह है कि इसी दौरान उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और कश्मीर के कई इलाकों में तापमान दिल्ली से ज्यादा रहा. इसी विरोधाभास ने लोगों के मन में सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर राजधानी इतनी ठंडी क्यों हो गई है.

जब मैदानी शहर पहाड़ों से ठंडे हो जाएं

आमतौर पर पहाड़ी क्षेत्रों को ठंड का गढ़ माना जाता है, जबकि मैदानी इलाके अपेक्षाकृत गर्म रहते हैं. लेकिन इस बार स्थिति उलटी नजर आई. पहाड़ों में बादल और हल्की नमी तापमान को अत्यधिक गिरने से रोक लेती है, जबकि दिल्ली जैसे खुले मैदानों में साफ आसमान और सूखी हवा रात में तेजी से गर्मी को बाहर निकलने देती है. कंक्रीट की इमारतें और प्रदूषण भी गर्मी को रोकने में नाकाम रहते हैं, जिससे तापमान तेजी से गिर जाता है.

पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हवाएं

दिल्ली की भीषण सर्दी के पीछे पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी हवाएं बड़ी वजह हैं. ये हवाएं मध्य एशिया, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के ठंडे इलाकों से होकर आती हैं और अपने साथ बेहद ठंडी व शुष्क हवा लाती हैं. दिसंबर-जनवरी में इनका असर सबसे ज्यादा होता है, जिससे ‘गलन’ वाली ठंड महसूस होती है.

पहाड़ों में बर्फबारी

जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में हो रही बर्फबारी भी मैदानी इलाकों को ठंडा करती है. बर्फ से ठंडी हुई हवा धीरे-धीरे दिल्ली तक पहुंचती है और कई दिनों तक तापमान को नीचे बनाए रखती है.

नमी, कोहरा और प्रदूषण

सुबह की धुंध और प्रदूषण सर्दी को और बढ़ा देते हैं. ये सूरज की किरणों को धरती तक पूरी तरह पहुंचने से रोकते हैं, जिससे दिन में भी पर्याप्त गर्मी नहीं मिल पाती.

शीत लहर का वैज्ञानिक मतलब

मौसम विज्ञान के अनुसार जब न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5 से 6.5 डिग्री नीचे चला जाए, तो उसे शीत लहर कहा जाता है. दिल्ली फिलहाल इसी स्थिति से गुजर रही है.

आगे क्या कहता है मौसम?

मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों तक ठंड से बड़ी राहत की उम्मीद नहीं है. फरवरी के पहले या दूसरे सप्ताह के बाद ही तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी संभव है. तब तक लोगों को सतर्क रहकर ठंड से बचाव करने की सलाह दी गई है.

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