बॉन्ड सिस्टम के बाद भी BJP की आय में ऐतिहासिक बढ़ोतरी, कॉरपोरेट चंदे में तीन गुना उछाल
वित्त वर्ष 2024-25 में भाजपा को स्वैच्छिक चंदे से 6,125 करोड़ रुपये मिले, जो पिछले साल से 54% अधिक है. चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बावजूद पार्टी की आय बढ़ी, जबकि कांग्रेस की चंदा आय में तेज गिरावट दर्ज हुई.

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को वित्त वर्ष 2024-25 में मिलने वाला स्वैच्छिक चंदा पिछले वर्ष की तुलना में काफ़ी बढ़ गया है. ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में पार्टी को इस अवधि में लगभग 6,125 करोड़ रुपये का स्वैच्छिक अंशदान प्राप्त हुआ, जो 2023-24 के 3,967 करोड़ रुपये से करीब 54 प्रतिशत अधिक है. यह बढ़ोतरी उस समय देखने को मिली है जब चुनावी बॉन्ड प्रणाली को सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2024 में रद्द कर दिया था.
चुनावी बॉन्ड खत्म होने से यह माना जा रहा था कि राजनीतिक दलों की आय पर असर पड़ेगा, खासकर भाजपा पर, जिसने 2023-24 में बॉन्ड के जरिए लगभग 1,686 करोड़ रुपये जुटाए थे. लेकिन इसके उलट, 2024-25 में भाजपा की कुल आय में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई. पार्टी की वार्षिक लेखा परीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों और संगठनों से मिलने वाले चंदे में लगभग तीन गुना वृद्धि हुई. जहां 2023-24 में कॉरपोरेट चंदा 1,885 करोड़ रुपये था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 5,422 करोड़ रुपये हो गया.
कांग्रेस की स्थिति: आय में गिरावट
वहीं, विपक्षी दल कांग्रेस के लिए स्थिति अलग रही. पार्टी को 2024-25 में अनुदान, चंदा और अंशदान से मिलने वाली राशि में भारी गिरावट देखने को मिली. यह रकम 1,130 करोड़ रुपये से घटकर 522 करोड़ रुपये रह गई, यानी लगभग 54 प्रतिशत की कमी.
इस गिरावट का एक बड़ा कारण चुनावी बॉन्ड का खत्म होना माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस ने 2023-24 में इसी माध्यम से लगभग 828 करोड़ रुपये जुटाए थे. कांग्रेस ने अपनी रिपोर्ट में 2024-25 के लिए 918 करोड़ रुपये की कुल आय और 1,112 करोड़ रुपये के खर्च की जानकारी दी है.
व्यक्तिगत दानदाताओं का योगदान
भाजपा को सिर्फ कंपनियों से ही नहीं, बल्कि व्यक्तिगत दानदाताओं से भी अधिक सहयोग मिला. 2024-25 में व्यक्तियों ने भाजपा को 641 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जबकि 2023-24 में यह राशि 240 करोड़ रुपये थी.
भाजपा की कुल आय और खर्च का पूरा ब्योरा
भाजपा की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी की कुल आय 6,769 करोड़ रुपये रही. इसमें
6,125 करोड़ रुपये स्वैच्छिक चंदे से
634 करोड़ रुपये बैंकों से ब्याज के रूप में
5.7 करोड़ रुपये शुल्क और सदस्यता से
4.5 करोड़ रुपये अन्य स्रोतों से प्राप्त हुए
खर्च की बात करें तो भाजपा ने 3,775 करोड़ रुपये खर्च किए, जिनमें से 3,335 करोड़ रुपये चुनाव प्रचार पर खर्च हुए. यह राशि पिछले वर्ष के चुनाव खर्च से लगभग दोगुनी है.
प्रचार पर भारी निवेश
भाजपा ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रचार पर सबसे अधिक खर्च किया, जो 1,125 करोड़ रुपये रहा. इसके अलावा
होर्डिंग्स पर 107 करोड़ रुपये
हवाई यात्रा पर 583 करोड़ रुपये
उम्मीदवारों को आर्थिक सहायता पर 313 करोड़ रुपये
रैलियों और मोर्चों पर 91 करोड़ रुपये
बैठकों पर 52 करोड़ रुपये खर्च किए गए
साल के अंत में मजबूत वित्तीय स्थिति
भाजपा ने 2024-25 की शुरुआत 9,170 करोड़ रुपये की शुरुआती राशि के साथ की थी. साल के अंत में पार्टी ने 2,995 करोड़ रुपये का अधिशेष दर्ज किया, जिससे समापन शेष बढ़कर 12,164 करोड़ रुपये हो गया. यह आंकड़े साफ दिखाते हैं कि चुनावी बॉन्ड खत्म होने के बावजूद भाजपा की वित्तीय स्थिति न सिर्फ स्थिर रही, बल्कि और मजबूत हुई, जबकि कांग्रेस को इस बदलाव का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा.


