ताइवान से पाकिस्तान तक फैले डिजिटल अरेस्ट स्कैम के तार, अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 100 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है. ATS अधिकारी बनकर डराने वाले इस नेटवर्क के तार पाकिस्तान सहित कई देशों से जुड़े पाए गए हैं.

दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर हजारों लोगों से करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी की. यह गिरोह खुद को एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) का अधिकारी बताकर लोगों को फोन करता था और उन्हें आतंकवाद से जुड़े मामलों में फंसाने की धमकी देता था. इस मामले में अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि जांच में गिरोह के तार पाकिस्तान समेत कई विदेशी देशों से जुड़े पाए गए हैं.
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस ठगी की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई थी. ठग पीड़ितों को फोन कर कहते थे कि उनका मोबाइल नंबर पहलगाम आतंकी हमला या दिल्ली के रेड फोर्ट ब्लास्ट जैसे गंभीर मामलों में इस्तेमाल हुआ है. इसके बाद उन्हें तुरंत गिरफ्तारी की धमकी दी जाती थी. डर के माहौल में पीड़ितों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में होने की बात कहकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया जाता था. कई लोग डर के कारण अपनी जमा पूंजी तक गंवा बैठे.
विदेशी ठिकानों से संचालित हो रहा था रैकेट
जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन भारत के बाहर से किया जा रहा था. चीन, नेपाल, कंबोडिया, ताइवान और पाकिस्तान से जुड़े साइबर अपराधी इस गिरोह को चला रहे थे. कॉल सेंटर जैसे सेटअप विदेशों में थे, लेकिन तकनीक के जरिए कॉल भारत की लोकल कॉल की तरह दिखाई जाती थी, जिससे लोगों को शक न हो.
SIM बॉक्स और तकनीक का खतरनाक इस्तेमाल
इस गिरोह ने अवैध SIM बॉक्स डिवाइस का इस्तेमाल किया. इन डिवाइस में एक साथ सैकड़ों SIM कार्ड लगाए जाते हैं, जिससे विदेश से आने वाली कॉल भी भारतीय नंबर जैसी लगती है. ठगों ने जानबूझकर 2G नेटवर्क का इस्तेमाल किया ताकि उनकी लोकेशन को ट्रैक करना मुश्किल हो जाए. जांच में सामने आया कि IMEI नंबरों को बार-बार बदला जाता था, जिससे एक ही नंबर अलग-अलग शहरों से सक्रिय दिखता था.
फॉरेंसिक जांच में करीब 5,000 से ज्यादा संदिग्ध IMEI नंबर और लगभग 20,000 SIM कार्ड इस नेटवर्क से जुड़े पाए गए. दिल्ली, मुंबई और मोहाली से 22 SIM बॉक्स, मोबाइल फोन, लैपटॉप, राउटर, सीसीटीवी कैमरे और विदेशी SIM कार्ड बरामद किए गए हैं.
कैसे हुआ खुलासा
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट ने विशेष टीम बनाई. इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर और दूरसंचार विभाग की मदद से तकनीकी जांच शुरू हुई. सबसे पहले दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में एक SIM बॉक्स का पता चला. इसके बाद कई ठिकानों पर छापेमारी कर दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो दिल्ली में नेटवर्क संभाल रहे थे.
ताइवान और पाकिस्तान से जुड़ा कनेक्शन
जांच में पता चला कि SIM बॉक्स डिवाइस ताइवान से सप्लाई की गई थीं. एक ताइवानी नागरिक को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया, जिसे इस नेटवर्क का तकनीकी दिमाग माना जा रहा है. आगे की जांच में पंजाब, महाराष्ट्र और तमिलनाडु तक नेटवर्क फैलने के सबूत मिले. क्रिप्टोकरेंसी के जरिए पैसों की हेराफेरी भी सामने आई है. पुलिस का मानना है कि एक पाकिस्तानी हैंडलर इस पूरे रैकेट को निर्देश और फंडिंग दे रहा था.
पुलिस की अपील
दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह की ‘डिजिटल अरेस्ट’, गिरफ्तारी या धमकी भरी कॉल पर भरोसा न करें. ऐसी किसी भी कॉल की तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें. यह मामला दिखाता है कि डर और तकनीक के सहारे कैसे संगठित अपराध आम लोगों को निशाना बना रहे हैं.


